राम की लीला में अल्लाह के बंदे का हुआ सम्मान

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अजीतगंज। अब तो बस एक ही तेरा मेरा ईमान हो, एक तरफ गीता हो और एक तरफ कुरान हो। काश ऐसी भी मोहब्बत हो अभी इस देश में, मेरा घर रोजा रखे जब तेरे घर रमजान हो। हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल ये लाइनें सबने खूब पढ़ी और सुनी होंगी, लेकिन वास्तव में इन धार्मिक बंदिशों की बेड़ियों को तोड़ तस्लीम अली दुनिया को एक होने का संदेश दे रहे हैं।

एक ओर जहां राममंदिर को लेकर दो धर्म आपस में बंटे हुए हैं। तो वहीं गांव अजीतगंज निवासी तस्लीम अली (23) उन्हीं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की लीला में पूरे मनयोग से सेवा कर रहे हैं। न उन्हें किसी नाम की चिंता है और न ही पद की लालसा। बस उद्देश्य है तो इतना कि आयोजन में कहीं कोई कमी न रह जाए।...

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