वृद्ध मां का टूटा धैर्य, हादसे में मृत बेटे को दी मुखाग्नि

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अनूपपुर। अभी तक सामाजिक व्यवस्था में बेटा द्वारा मां-बाप सहित अन्य को मुखाग्नि देकर पुत्र धर्म का निवर्हन करते आए है। जिसमें बाद में पुत्रों के अभाव में पुत्रियों ने पुत्र का स्थान लेकर अपने परिवार के सदस्यों का अंतिम संस्कार की रस्म अदाएगी की। वहीं कुछ स्थानों पर बहन ने भाई का अंतिम संस्कार कर माता पिता के रूप में अभिभावक का फर्ज निभाया। लेकिन १३ अक्टूबर को पसान नगरपालिका वार्ड क्रमांक १३ में एक ६० वर्षीय वृद्धा मां ने अपने ३७ साल के एकलौते बेटे का मुखाग्नि व अंतिम संस्कार कर समाज के लिए अलग मिसाल बनी। हालांकि मृतक के पुत्र भगवानदीन की १० वर्षीय पुत्री भी है। लेकिन १० वर्षीय अबोध बालिका के सिर अंत्येष्टि का बोझ नहंी पडऩे देने से बचाने मां ने खुद ही आगे आकर पुत्र के अंतिम संस्कर की रस्म निभाई। मां द्वारा निभाए जा रहे अंतिम संस्कार के रस्म को समाज का हरेक व्यक्ति आंखें खोल निहार रहा था, जहां कभी महिलाओं के लिए वर्चित श्मसान भूमि पर महिला पुरूषों की भांति मंत्रोच्चाण के साथ पुत्र का अंतिम संस्कार कर रही थी। विदित हो कि 12 अक्टूबर को भालूमाड़ा वार्ड क्रमांक 13 निवासी भगवानदीन निषाद पिता स्व. वासुदेव निषाद दोपहर 12 कदमटोला गांव के पास अज्ञात वाहन की ठोकर में आसामयिक मौत का शिकार बन गया था। किसी अज्ञात जीप ने तेज रफ्तार में टक्कर मारते हुए २०-२५ फीट घिसिटते दूर छोड़ दिया। घटना की सूचना पर मौके पर परिजन पहुंचे भी, लेकिन भगवानदीन हमेशा के लिए गहरी नींद में सो गया था। बताया जाता है कि जब भगवानदीन बहुत छोटा था तब उसके पिता का निधन हो गया था। पिता ने पहली पत्नी के बाद भी अन्य से शादी कर ली थी। जहां पिता के अभाव में मां ने बचपन से अकेले उसका लालन पालन करते हुए अबतक देखभाल की। शायद यही सोचकर मां ने सीने पर पत्थर रखकर पुत्र के अंतिम समय में खुद मुखाग्नि देकर यह फर्ज की रस्म भी पूरी कर दी।...

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