अंग्रेज इतिहासकारों, वामपंथियों को दोष देना बंद करें और सत्य पर आधारित इतिहास लिखें- अमित शाह

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वाराणसी: भारत के दृष्टिकोण से इतिहास के पुनर्लेखन की बात पर जोर देते हुये केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि वीर सावरकर न होते तो 1857 की क्रांति इतिहास न बनती और उसको भी हम अंग्रेजों की दृष्टि से ही देखते. वीर सावरकर ने ही 1857 की क्रांति को 'पहला स्वतंत्रता संग्राम' नाम देने का काम किया वरना आज भी हमारे बच्चे उसे "विद्रोह" के नाम से जानते.

उन्होंने कहा कि 'वामपंथियों को अंग्रेज इतिहासकारों को दोष देने से कुछ नहीं होगा. हमें अपने दृष्टिकोण को बदलना होगा. हमें हमारी मेहनत करने की दिशा को केंद्रित करना होगा. कब तक वामपंथियों को गाली देंगे, कब तक हम अंग्रेज इतिहासकारों की नजर से देश को देखेंगे, उनको गए हुए 70 साल हो गए और अब समय आया है, हमारे देश के इतिहासकारों को एक नए दृष्टिकोण के साथ इतिहास को लिखने का. मैं अब भी कहता हूं कि पहले जिसने लिखा है, इसके साथ विवाद में न पड़ो, इन्होंने जो लिखा है वह लिखा है, हम सत्य को ढूंढकर सत्य को लिखने का काम करें. मैं मानता हूं कि नया जो लिखा जायेगा वह सत्य होगा और लंबा भी चलेगा चिरंजीव होगा, उस दिशा में हमें आगे बढ़ना होगा.'

दुनिया में बढ़ा भारत का सम्मान

शाह ने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में आज देश फिर से एक बार अपनी गरिमा प्राप्त कर रहा है, आज पूरी दुनिया के अंदर भारत का सम्मान मोदी जी के नेतृत्व में बढ़ा है. पूरी दुनिया आज भारत के विचार को महत्व देती है. दुनिया के किसी भी कोने में कुछ भी हो जाये भारत के प्रधानमंत्री क्या बोलते हैं इसका एक महत्व दुनिया के अंदर प्रस्थापित करने का काम हमारे प्रधानमंत्री और आपके सांसद नरेंद्र मोदी जी ने किया है.

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