कचौरी ही नहीं, कचौरे के भी शौकीन हैं हम, रोजाना खा रहे आधा क्विंटल

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कोटा. कोटा और यहां के लोग कचौरी प्रेम के लिए जाने जाते हैं। राष्ट्रीय दशहरा मेले में बिक रहा नसीराबाद का कचौरा इसकी तस्दीक करता है कि कचौरी ही नहीं कोटा वाले इस कचौरे के भी शौकीन हैं। नसीराबाद के प्रसिद्ध कचौरे की दोनों दुकानों पर लगी भीड़ इसकी गवाह है। कचौरा की प्रसिद्धि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मेले में आने वाले लोग प्रतिदिन आधा क्विंटल यानी तकरीबन 1.50 लाख रुपए का कचौरा खा जाते हैं। नसीराबाद का कचौरा दुकान के संचालक राजेन्द्र अग्रवाल ने बताया कचौरा दो तरह का होता है, एक उड़द दाल व दूसरा आलू-बेसन का। हमारी दुकान पर दोनों 320 रुपए प्रति किलो की दर से मिल रहे हैं। वहीं कोटा की कचौरे की दुकान पर यही 360 रुपए किलो है। मेले में दुकान दोपहर 1 बजे से रात्रि 1 बजे तक खुली रहती है। कचौरा बनाने में 22 मजदूर लगातार 12 घंटे लगे रहते है। ये सभी नसीराबाद के ही हैं। उन्होंने बताया कि नसीराबाद में कचौरा बिना चटनी के ही खाया जाता है, जबकि कोटा में बिना चटनी के इसे कोई नहीं खाना पसंद करता।...

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