चंद्रा ने डूबने नहीं दिया चांद, किडनी दे दी दान

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बाड़मेर. औरतें व्रत-त्यौहार रखकर पति की लंबी उम्र की दुआ करती है। उनकी जुबान पर यह प्रार्थना भी रहती है कि उनकी उम्र भी सुहाग को लग जाए लेकिन वे सदा सुहागिन रहे। महिलाएं एेसा कहती भी नहीं है वे अपने सुहाग के लिए खुद की जान भी दांव पर लगा देती है।

बोला गांव की चंद्रा ने अपने चांद (पति) को बचाने के लिए अपनी कीडनी दे दी और अब दोनों पति-पत्नी एक-एक किडनी के सहारे जिंदगी जी रहे है।

बोला गांव के राशन डीलर चुतराराम 2008 में बीमार हुए। अहमदबाद में जांच करवाई तो दोनों किडनी फेल बताई। इसके बाद डायलिसिस पर आ गए और किडनी ट्रांसप्लांट ही उनकी जिंदगी बचाने का जरिया था। पत्नी चंद्रादेवी को पता चलते ही तुरंत तैयार हुई और अपनी कीडनी दे दी।...

फोटो - http://v.duta.us/OqwhqgAA

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