दुष्कर्म पीड़ित छात्रा और उसके भाई का नहीं हो पाया एडमिशन

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शाहजहांपुर। दुष्कर्म के आरोपी चिन्मयानंद मामले में एसआईटी की जांच शुरू होने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने शासन-प्रशासन को पीड़ित छात्रा और उसके भाई की पढ़ाई वाधित न होने देने का निर्देश दिया था। आदेश था कि छात्रा और उसके भाई का एडमिशन ऐसे कॉलेज में करा दिया जाए, जहां उन्हें दिक्कत न हो। अब तक एडमिशन की प्रक्रिया नहीं हो पाई है, जबकि छात्रा के पिता की ओर से तय की गई अंतिम तारीख 18 अक्तूबर है। पीड़ित छात्रा के पिता बुधवार को एडमिशन के संबंध में डीएम से मिले।

पीड़ित छात्रा को 30 अक्तूबर को राजस्थान के दौसा जिले से तलाश करने के बाद उसे सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया था। छात्रा के बयान दर्ज करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच इलाहाबाद हाईकोर्ट की निगरानी में एसआईटी से कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही यह भी निर्देशित किया कि छात्रा और उसका भाई चिन्मयानंद के कॉलेज में पढ़ रहे हैं तो उनकी पढ़ाई वाधित हो सकती है। लिहाजा दोनों का एडमिशन किसी अन्य कॉलेज में कराया जाए। इसके लिए प्रशासन ने कवायद शुरू की तो बरेली विश्व विद्यालय में एडमिशन कराने पर बात हुई। जांच के शुरूआती दौर में एसडीएम सदर ने छात्रा के घर पहुंचकर एडमिशन को लेकर बातचीत की और लौट गए। तब से मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। छात्रा को चिन्मयानंद से फिरौती मामले मेें आरोपी मानकर जेल भेज दिया गया। पिता ने एडमिशन के लिए प्रयास किया तो बहाना बनाकर टरका दिया गया। छात्रा के पिता का आरोप है कि प्रशासन उसके बेटे और बेटी का एडमिशन नहीं करा रहा है। जबकि छात्रा के पिता तीन अक्तूबर को एडमीशन के लिए डीएम को लिखकर दे चुके हैं। पीड़ित के पिता ने बताया कि बुधवार को वह डीएम से मिले थे। उनकी गुजारिश पर डीएम ने पीड़ित छात्रा के जेल में होने से एडमीशन कराने से इनकार कर दिया। जबकि छात्रा के भाई को प्रवेश दिलाने का भरोसा दिलाया है।

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