दो करोड़ राजस्व की वसूली, सुिवधाएं नगण्य

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बीहट : सिमरिया में भारी कुव्यवस्था के बाद भी कार्तिक माह के मौके पर पर्णकुटीर बनाकर समस्तीपुर, मधुबनी,दरभंगा समेत अन्य जिले के लोग पहुंच कर सिमरिया में पूजा-पाठ करते हैं. प्रत्येक वर्ष हजारों लोग आते हैं, यहां से जाने के बाद उन्हें लगता है कि इस बार सिमरिया का विकास हुआ होगा,लेकिन पुन: आने पर सिमरिया को उसी रूप में देखकर कल्पवासी द्रवित हो उठते हैं. मेले के दाैरान सिमरिया घाट से दो करोड़ से अधिक के राजस्व की वसूली होती है लेकिन उसके विकास के लिए एक पैसा भी खर्च नहीं किया जाता है.

वर्ष 2006 में किया गया था राजकीय मेला घोषित :सिमरिया घाट का अपना अलग महत्व है.अनादि काल से चल रही कल्पवास की परंपरा आज भी कायम है. वर्ष-2006 में बिहार सरकार ने इसे राजकीय मेले का दर्जा प्रदान तो कर दिया परंतु सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ. सिमरिया घाट के जमा-खाते में घोषित योजनाओं की लंबी फेहरिस्त है.सपनों और उम्मीदों के अलावा जमीन पर अभी तक कुछ खास नहीं बदला है....

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