धन के लालच में बैंक की आंखों में धूल झोंकी...सरकारी कार्मिक होने के बावजूद कर दिया आवेदन

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भुवनेश पंड्या/उदयपुर. धन के लालच ने सरकारी कर्मचारियों को इतना गिरा दिया कि इन्होंने सरकार को धोखा देने की कोशिश की, लेकिन आखिरकार फंस गए। किसानों को दिए जाने वाले फसली ऋण में इन सरकारी कर्मचारियों की ओर से आवेदन करने का गंभीर मामला सामने आया है। बैंकों ने आनन-फानन में राशि तो जारी कर दी, लेकिन बैंकों की ओर से झूठ पकड़े जाने के बाद इन कार्मिकों को राशि लौटानी पड़ी। बैंक की सजगता से सभी जिलों के इन को-ऑपरेटिव बैंकों को 2176 लाख रुपए का फटका लगते-लगते बच गया।

7893 कर्मचारियों ने किया लाभ उठाने का प्रयास

प्रदेश के 7893 सरकारी कर्मचारियों ने को-ऑपरेटिव बैंकों में ऋण माफी योजना के तहत लाभ उठाने का प्रयास किया। इसमें उदयपुर, अलवर, अजमेर, पाली, सवाई माधोपुर, जोधपुर, झालावाड़, जैसलमेर, चित्तौडगढ़़ और भीलवाड़ा के कर्मचारी ईमानदार निकले। यानी इन जिलों के कर्मचारियों ने यह गफलत करने का प्रयास नहीं किया। वहीं उदयपुर संभाग के डूंगरपुर जिले के सर्वाधिक 1790 कार्मिकों ने 512.06 लाख रुपए तो भरतपुर के 1129 कार्मिकों ने 338.45 लाख रुपए स्वीकृत करवा लिए।...

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