राम के चरित्र को जीवन में उतारें

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मरदह। अति प्राचीन रामलीला कमेटी मरदह कुटी की ओर से भरत मिलाप, राज्याभिषेक आदि लीला का मंचन परंपरागत ढंग से किया गया। अध्योया वापसी पर चारो भाइयों के मिलन की झांकी प्रस्तुत की गई। इसके बाद भगवान राम को राजगद्दी दी गई। मुकुट एवं तिलक लगा कर विधिवत आरती-पूजन हुआ। इस अवसर प्रधान प्रतिनिधि राजू सिंह ने कहा कि माता-पिता की सेवा कर जीवन को धन्य बनाएं। प्रभु श्रीराम के आदर्शों का अनुकरण मनुष्य को सत्यमार्ग पर ले जाता है। अन्य वक्ताओं ने कहा कि माता-पिता की सेवा से बढ़कर कोई सेवा या तीर्थ स्थल नहीं है। सभी में मर्यादा पुरुषोत्तम की तरह संस्कार और त्याग होना चाहिए। प्राचीन काल से चली आ रही श्रीरामलीला का मंचन सिर्फ देखने एवं मनोरंजन मात्र का विषय नहीं है। इस रामलीला का मंचन इसलिए किया जाता है कि हम मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम तथा रामायण के अन्य पात्रों के जीवन चरित्र का सूक्ष्मता से अवलोकन कर उसे जीवन में उतारते हुए परिवार एवं समाज में हम भी वैसा ही आचरण करें। इस अवसर पर प्रेमनरायण सिंह, रणधीर सिंह, सुरेंद्र राजभर, यशवंत सिंह, शशिप्रकाश, शशिकांत, लल्लन, श्रीकांत, पप्पू, बलवंत, नीरज, अंकित, ओमकार, पियूष, अभय, अनिल, रविप्रताप, लालबाबू, जयराम, त्रिलोकीनाथ, सत्यम, आर्यन, मनीष, गुड्डू, राजेश वर्मा, नगीना मौर्य, दीनानाथ, हीरालाल आदि उपस्थित थे।...

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