सबकी रक्षा करते हैं महादेव : स्वरूपानंद

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कैराना। डीके कांवेंट स्कूल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास स्वामी स्वरूपानंद महाराज ने बताया कि समुद्र मंथन के समय 16 रत्नों में से एक हलाहल विष निकाला था। महादेव जी सबकी रक्षा करते है, इसलिए इन्हें शिव कहा जाता है।

सृष्टि की रक्षा के लिए महादेव ने विष पान किया था तथा हलाहल विष को कंठ में ही रखा था। इसलिए इन्हे नीलकंठ कहा जाता है। महाराज उत्तान पाद की दो रानियां थीं सुरुचि और सुनीति। ध्रुव सुनीति के पुत्र थे। रानी सुरुचि के कहने पर महाराज उत्तान पाद ने सुनीति को महल से बाहर निकाल दिया था। लेकिन यह बात सुनीति ने ध्रुव को नहीं बताई। सुनीति ने ध्रुव को अच्छी शिक्षा व संस्कार दिए, लेकिन ध्रुव के पिता ने जैसे ही ध्रुव को गोद में बैठाना चाहा तो सुरुचि ने ध्रुव को गोद में बैठने नहीं दिया। तथा कहा कि यदि राजा की गोद में बैठना है तो पहले मेरे पेट से अगले जन्म में पैदा होना होगा, लेकिन सुनीति ने पुत्र ध्रुव को श्रीनारायण की प्रार्थना करने की शिक्षा दी। ध्रुव जंगलों में गया जहां नारदजी ने ध्रुव को शिक्षा दी। ध्रुव ने अडिग प्रतिज्ञा की तथा यमुना किनारे कोकिल वन में कठिन तपस्या की तथा तीन दिन में कंद मुल फल खाकर धीरे धीरे भूखे प्यासे रहकर नारायण से वर प्राप्त किया। बाद में नारायण लोक में चले गए, इसलिए कहा गया है कि ओइम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप जो करता है उसे मन वांछित फल मिलता है। मौके पर नरेश चंद गर्ग, रघुराज सिंह, रामकुमार, रामपाल सिंह, स्वराज शर्मा, शिवराष्ट आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।

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