हर वार्ड मेंअप्रशिक्षत प्राइवेट अटेंडर, वेरीफिकेशन हुआ न कोई रिकॉर्ड, अस्पताल स्टाफ की तरह रुतबा

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भिलाई. बीएसपी के जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र सेक्टर-9 में मंगलवार को एक प्राइवेट अटेंडर द्वारा नौ साल की मासूम के साथ दुष्कर्म ने सभी को झकझोर कर रख दिया। इसके बाद भी अस्पताल प्रबंधन अपनी खामियां दूर करने की जगह परिजनों को ही दोषी बता रहा है। घटना के बाद भी प्राइवेट अंटेंडर रोज की तरह बुधवार को वार्डों में नजर आए। जो अटेंडर हैं, वे न तो प्रशिक्षित है और न ही आज तक उनका वेरीफिकेशन हुआ है। अस्पताल में इनका रिकॉर्ड भी नहीं रहता। इनका अलग-अलग रेट तय है। परिजनों को डॉक्टर ही प्राइवेट अटेंडर रखने का सुझाव देते हैं। बीएसपी के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं विभाग के निदेशक डॉ. एसके ईस्सर का कहना है कि घटना के बच्ची के परिजन जिम्मेदार हैं। वे मानने को तैयार नहीं हैं कि अस्पताल में अटेंडर की कमी है। जबकि पत्रिका ने विभिन्न वार्डों का जायजा लिया तो देखा कि ठेके के अटेंडर सिर्फ प्रबंधन का कामकाज निपटा रहे थे। वे भर्ती मरीजों की तरफ देखते भी नहीं। प्राइवेट अटेंडर मरीजों के साथ थे। पहले अस्पताल में लगभग 350 प्रशिक्षित अटेंडर थे। वर्तमान में लगभग ७० हैं, उन्हें भी प्रबंधन ने ड्रेसर व अन्य काम सौंप दिया है। ठेके में दिहाड़ी अटेंडर रखे गए हैं जो वार्ड में तो रहते हैं, लेकिन विभागीय कामकाज निपटाते हैं।...

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