काहे का राजकीय मेला, बजट के नाम पर नहीं धेला

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चरखारी (महोबा)। कस्बा चरखारी के 136 साल पुराने ऐतिहासिक गोवर्धन्नाथ जू महाराज मेले को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। शासन-प्रशासन की उपेक्षा के चलते मेले में भव्यता नहीं आ पा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गोवर्धन्नाथ जू मेले को राजकीय मेला घोषित किया था। लोगों को काफी उम्मीदें थी लेकिन मेले के हालात जस के तस हैं। प्रदेश सरकार द्वारा इस साल भी उसके सौंदर्यीकरण या अन्य विकास कार्यों के नाम पर बजट न मिलने से क्षेत्रीय लोगों में मायूसी है। पालिका प्रशासन अपने स्तर पर ही काम कराएगा।

चरखारी रियासत के महाराज मलखान सिंह जूदेव द्वारा सन 1883 में गोवर्धन्नाथ जू मेले की शुरूआत की थी। दीवाली के दूसरे दिन से लगने वाला मेला एक माह तक चलेगा। इस दौरान दिन में धार्मिक व खेलकूद जबकि रात के समय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। मेले को लेकर लेकर दूर-दराज के दुकानदारों व झूला संचालकों ने डेरा जमाना शुरू कर दिया है। मेले में महज एक सप्ताह का समय शेष होने के चलते आयोजक पालिका प्रशासन द्वारा मंदिरों की रंगाई-पुताई के साथ अन्य व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई जा रहीं हैं।...

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