आत्महत्या अचानक से घटित हुई कोई घटना नहीं है

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वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के गांधी अध्ययन सभागार में रविवार को 'आत्महत्या एवं चुनौतियां' विषय पर अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। मुख्य अतिथि संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय डॉ. पीके श्रीवास्तव ने आत्महत्या से संबंधित बढ़ते आंकड़ों पर चिंता जताते हुए इसके समाधान के लिए पारिवारिक अधिपत्य और देखभाल को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समाज में मनोवैज्ञानिकों की भूमिका दायित्व के रूप में बढ़ती जा रही है। विशिष्ट अतिथि के रामचंद्रन ने आत्महत्या अवबोधन एवं उसके क्रियाशील आयामों पर विस्तार से चर्चा की।

अमेरिका से आई डॉ. शारदा एम. अम्मा ने जीवन की पूर्णता को गीतों के माध्यम से प्रकट किया। इंडियन एकेडमी ऑफ हेल्थ साइकोलॉजी के अध्यक्ष प्रो. आनंद कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि आत्महत्या के लिए विभिन्न प्रकार की चुनौतियां समस्या के रूप में मनोवैज्ञानिकों को दिखलाई पड़ती है। इसके व्यापक समाधान के लिए चिकित्सकों को विभिन्न प्रकार के सामयिक विकल्पों की आवश्यकता होती है। अध्यक्षता करते हुए काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने आत्महत्या से सह संबंधित आंकड़ों को बताते हुए संपूर्ण एशिया में आत्महत्या की प्रवृत्ति पर चिंता जताई। स्वागत मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आरपी सिंह, धन्यवाद डॉ. राजेंद्र सिंह ने दिया। कार्यशाला में देश-विदेश से लगभग 500 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। क ार्यक्रम में मंजू ठाकुर पुरस्कार प्रो. जितेंद्र मोहन को दिया गया। मुख्य रूप से डॉ. रश्मि सिंह, डॉ. दुर्गेश उपाध्याय, डॉ. मुकेश पथ, डॉ. संतोष कुमार सिंह, डॉ. रमेश कुमार सिंह, डॉ. जिनेश कुमार, डॉ. रामकीर्ति सिंह, डॉ. पूर्णिमा, डॉ. पूनम आदि मौजूद रहीं।

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