मैं बड़ा हूं मुझे कमाने दो साब... नहीं तो भाई-बहन मर जाएंगें भूखे

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मोहम्मद इलियास/उदयपुर

साब! मैं 16 साल का हूं। पिता नहीं है, सभी भाई-बहन छोटे है। मैं नहीं कमाऊंगा तो परिवार का पेट कौन भरेगा, मेरी मजबूरी है। जिम्मेदारी के चलते नवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी, मुझे कमाने दो...। यह पीड़ा उस गरीब की है, जिसे दो दिन पहले पुलिस ने बाल श्रमिक के लिए चलाए 'आशा अभियान' के तहत पकड़ा था। पुलिस ने जब इस बालक को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया तो उनके समक्ष भी रोता बिलखता रहा। उसे पकड़ में आने से ज्यादा दुख उसके भाई-बहन का था और वह बार-बार एक ही बात कह रहा था कि मैं नहीं कमाऊंगा तो उन्हें निवाला कौन करेगा। यह जिम्मेदारी भरी पीड़ा कागमदारड़ा खमनोर निवासी देवीसिंह पुत्र वदनसिंह की थी। जिसे सुनकर उसे पकडऩे वाली टीम व सीडब्ल्यूसी सदस्य अवाक रह गए। इस बालक की पीड़ा गरीबी के साथ ही अभियान के नाम पर की जाने वाली इस खानापूर्ति की भी पोल दी जिसमें मुक्त करवाए जाने वाले बालश्रमिकों के लिए सिर्फ धरपकड़ के अलावा आगे कोई काम नहीं हुआ।...

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