अब छत्तीसगढ़ी में एम्स के डॉक्टर पैर में चोट को कहेंगे 'गोड़ में घाव '

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रायपुर. राजधानी के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में 1 नवम्बर से एमबीबीएस फस्र्ट ईयर के छात्रों को छत्तीसगढ़ी पढ़ाना शुरू कर दिया जाएगा। एम्स मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने हिन्दी, अंग्रेजी, कम्प्यूटर और छत्तीसगढ़ी के एक्सपर्ट की तलाश पूरी कर ली है। छत्तीसगढ़ी सीखने के बाद छात्र पैर में चोट को गोड़ में घाव, कमर दर्द को अब कनिहा पिराना कहेंगे। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने देश के सभी मेडिकल कॉलेजों को स्थानीय बोलियों व भाषाओं की जानकारी छात्रों व डॉक्टर्स को देने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, एम्स मेडिकल कॉलेज में एमसीआई के नियम लागू नहीं होते, फिर भी छात्रों को स्थानीय भाषा में कोई दिक्कत न हो इसलिए सिखाया जाएगा। एम्स में एमबीबीएस की 100 सीटें हैं, जो पूरी हो गई है। गैर-हिंदी भाषी राज्यों से आने वाले छात्रों को छत्तीसगढ़ी की जानकारी नहीं होती। हिंदी भाषी राज्यों से आने वाले हिंदी मीडियम के कई छात्र अंग्रेजी में कमजोर होते हैं। वहीं, दक्षिण से आने छात्र हिन्दी में कमजोर होते हैं। छात्रों के लिए हिन्दी और अंग्रेजी के एक्सपर्ट पहले से रखे ही जाते थे, लेकिन इस बार छत्तीसगढ़ी एक्सपर्ट भी नियुक्त होंगे। एम्स में छात्रों की 15 एक्स्ट्रा क्लास लगाकर छत्तीसगढ़ी सिखाई जाएगी।...

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