कुल्लू दशहरा में देव संस्कृति पौराणिक परंपरा पर आज भी आधारित

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कुल्लू/खराहल। आधुनिक के दौर में सब कुछ परिवर्तित हो गया है। खान-पान और पहनावे से लेकर कई सामाजिक परंपराएं बदल गई हैं लेकिन कुल्लू दशहरा की देव संस्कृति का पौराणिक ढांचा आज भी उसी आस्था और निष्ठा के विश्वास के आवरण में बंधा है, जो सैकड़ों वर्ष पहले था। सैकड़ों किलोमीटर दूर से देवी-देवताओं को देवलु अपने कंधों पर उठाकर सम्मान और आदर के साथ इस महाकुंभ में देव परंपरा के निर्वहन करने पहुंचते हैं। आज भी देव समाज के लोग और कुल्लू के देवी-देवताओं के हारियान देव परंपरा को उसी विधिविधान और अटूट आस्था और निष्ठा के साथ निभा रहे हैं। अठारह करडू के सौह ढालपुर में सैकड़ों देवी-देवता रघुनाथ की रथयात्रा में शामिल हो रहे हैं।...

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