डोली भूति गिरत दसकंधर, छुभित सिंधु सरि दिग्गज भूधर

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डोली भूमि गिरत दसकंधर, छुभित सिंधु सरि दिग्गज भूधर। धरनि परेउ द्वौ खंड बढ़ाई, चापि भालु मर्कट समुदाई.. मंदोदरि आगे भुज सीसा, धरि सर चले जहां जगदीशा। प्रविसे सब निषंग महु आई, देखि सुरन्ह दुंदुभी बजाई।

दशहरा पर बुराई के प्रतीक रावण को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने जैसे ही मारा तो धरती एक तरह से हिलने लगी। रामचरित मानस की इस चौपाई को चरितार्थ करते हुए रामलीला मैदान में भगवान श्रीराम ने विभीषण की सलाह पर ज्यों ही उसकी नाभि का अमृत सुुुखाने के बाद बाण मारा तो विशाल आकार का रावण पृथ्वी पर गिर पड़ा। रावण के गिरते ही धरती हिलने लगी। मेले में कुंभकरण, मेघनाथ के पुतले भी दहन किए गए। तीनों पुतले दहन होते ही मेला मैदान जय श्रीराम के नारों से गुंजायमान हो उठा।...

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