देव महाकुंभ में उमड़ा आस्था का सैलाब, श्रीराम के उद्घोष से गूंजी रघुनाथ की नगरी

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कुल्लू। देवी-देवताओं के महाकुंभ अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के लिए सैकड़ों देवी-देवता लाव-लश्कर के साथ भगवान रघुनाथ की नगरी पहुंचे। रघुनाथ की नगरी में देवी-देवताओं की उपस्थिति से माहौल ऐसा बन गया कि मानो देवलोक के समस्त देवी-देवता देवलोक से उतरकर ढालपुर में आ गए हों। सैकड़ों देवी-देवताओं के देवरथों को उनके हारियानों और कारकूनों के साथ देखकर देश-विदेश से देव समागम में पहुंचे सैलानी इस अनूठे नजारे के गवाह बने। जबकि, सैलानियों ने अपने कैमरों और मोबाइलों में इस अद्भुत नजारे को कैद कर लिया।

इस दौरान वाद्ययंत्रों की थाप से समूची कुल्लू घाटी गूंज उठी। देवी-देवताओं के भव्य देवमिलन को देखने लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। कुल्लू में पहुंचने के बाद सभी देवी-देवताओं ने भगवान रघुनाथ के दरबार में हाजिरी भरी। इसके बाद देवता अपने-अपने शिविरों की ओर ढालपुर के लिए रवाना हुए। हालांकि, कुछ देवता सोमवार रात को ही ढालपुर मैदान में पहुंच गए थे। इन देवताओं की सोमवार सुबह विशेष पूजा आराधना की गई। इसके बाद देवी-देवताओं ने ढोल नगाड़ों की थाप पर रघुनाथपुर के लिए कूच किया। भगवान रघुनाथ के दरबार में उझी घाटी, खराहल घाटी, महाराजा कोठी, कोठी काईस, खोखण, सैंज, बंजार, आनी और निरंमड के देवताओं ने हाजिरी लगाई। एक साल के बाद देवी-देवताओं ने भगवान रघुनाथ के साथ देवमिलन किया। इस दौरान देवताओं को रघुनाथ की ओर से पग भी दी गई। ढोल नगाड़ों, नरसिंघों और करनाल की ध्वनियों से पूरा घाटी गूंज उठी। चार बजे के बाद करीब भगवान रघुनाथ, देवता बिजली महादेव और अन्य देवताओं के साथ ढालपुर मैदान पहुंचे। भगवान रघुनाथ के रथ में सवार होने के बाद भव्य रथयात्रा निकली। भगवान रघुनाथ के रथ को खींचने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु उमड़े। रथयात्रा अस्थायी शिविर तक पहुंचने के बाद भगवान अस्थायी शिविर में विराजमान हुए। अगले सात दिनों तक समस्त देवी-देवता अस्थायी शिविरों में ही रहेंगे।

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