धर्मनगरी काशी में हुआ बुराई के प्रतीक का अंत, डीरेका में रावण का दहन

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दशहरा पर भगवान राम की जय-जयकार होती रही। सत्य की असत्य पर जीत हुई। अहंकार की प्रतीक रावण मारा गया। धर्मनगरी काशी में मेघनाद, रावण और कुंभकर्ण के पुतले को धूं-धूं कर जलाया गया। डीरेका में मंगलवार शाम चार बजे से तीन घंटे तक संगीतमय रामलीला के प्रस्तुति के बाद श्रीराम ने पुतले का दहन किया।

मंगलवार को विजयदशमी पर डीरेका में पुतला दहन के पहले तीन घंटे के रूपक का मंचन हुआ। मैदान में अयोध्या, लंका, किष्किंधा पर्वत, समुद्र, अशोक वाटिका समेत कई स्थानों को तैयार किया गया। श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, हनुमान, रावण, कुंभकर्ण समेत अन्य सभी के चरित्र में तैयार कलाकारों ने रामायण की प्रस्तुति दी। राम वनगमन, सीता हरण, लंका दहन, लक्ष्मण पर शक्ति प्रयोग, राम विलाप, सीता अग्निपरीक्षा आदि विविध प्रसंगों को जीवंतता से दर्शाया।...

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