रावण दहन पर निगम में बवाल, महापौर बोले, शर्मनाक घटना, दागदार हुआ इतिहास..बिठाई जांच

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कोटा. कागज के बने फटे कपड़े... टूटे धड़ और खोखले जिस्म के बावजूद दसकंधर रावण दशहरा मैदान में ऐसा अड़ा कि निगम अफसरों और आतिशगरों की लाख कोशिशों के बाद भी उसका एक भी सिर नहीं जल सका। आखिर में आतिशगरों ने पुतले की रस्सियां खींच उसे नीचे गिरा कर रावण वध की रस्म अदायगी की। सवा सौ साल के इतिहास में पहली बार रावण के न जलने पर मेला अधिकारी आग और पानी को जिम्मेदार ठहराते रहे। वहीं महापौर और मेला आयोजन समिति ने इस अराजकता के लिए अफसरों को आड़े हाथों लिया। फिलहाल पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए पार्षदों की तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है। 126 वें राष्ट्रीय दशहरा मेला को यादगार बनाने के लिए इस बार 101 फीट ऊंचे रावण के पुतले का निर्माण किया गया था, लेकिन मंगलवार को जैसे ही लाखों लोगों की भीड़ दशहरा मैदान में पहुंची तो रावण के पुतले को दो टुकड़ों में बंटा देख हैरत में पड़ गई। कारीगर रावण के पुतले का धड़ और कमर से नीचे का हिस्सा आखिरी समय तक नहीं जोड़ सके। जिसके चलते दोनों के बीच करीब छह से सात फीट का गैप रह गया।...

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