विधानसभा चुनाव में महिला वर्ग को टिकट देने में बरती राजनीतिक दलों ने कंजूसी

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एक तरफ जहां राजनीतिक दल महिलाओं को उनके अधिकारी देने के लिए लंबे चौड़े वादे करते हैं, दूसरी तरफ विधानसभा चुनाव में जिले की चार सीटों पर 58 उम्मीदवारों में से मात्र 5 प्रत्याशी महिलाएं हैं। इसमें तीन महिला प्रत्याशी कलानौर तो दो रोहतक से चुनाव लड़ रही हैं। जबकि जिले में 1000 हजार पुरुषों के मुकाबले 903 महिलाएं हैं। इतना ही नहीं, महम में 83 हजार, गढ़ी सांपला-किलोई में 93 हजार, रोहतक शहर में 90 हजार और कलानौर में 91 हजार महिला वोटर हैं।

इस बार पिछले दो विधानसभा चुनावों के मुकाबले महिला प्रत्याशियों की भागीदारी बढ़ी है। 2014 के विधानसभा चुनावों में चार हलकों से मात्र एक ही महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में थी, जोकि चुनकर विधानसभा भी पहुंची थी। 2009 में दो ही महिला प्रत्याशी चुनाव लड़ी थी, जिनमें से एक ने जीत हासिल की थी। इस बार कलानौर सीट से बहुजन समाज पार्टी की प्रत्याशी कश्मीरी देवी, कांग्रेस से शकुंतला देवी व सीपीआईएम से कमलेश मैदान में है। वहीं रोहतक से रिपब्लिक पार्टी की प्रत्याशी संतोष व बहुजन समाज पार्टी की प्रत्याशी पूनम चुनाव लड़ रही है। गढ़ी सांपला किलोई से आजाद उम्मीदवार के तौर पर सुनीता ने फार्म नामांकन भरा था, जिन्होंने अंतिम दिन अपना नामांकन वापस ले लिया। वहीं महम की सीट से कोई भी महिला प्रत्याशी चुनावी मैदान में नहीं है। रोहतक से चुनाव लड़ रही संतोष व पूनम गृहिणी हैं तो वहीं कलानौर से चुनाव लड़ रही शकुंतला का प्रोफेसर राजनीति ही है। कलानौर से ही चुनाव लड़ रही कश्मीरी देवी एक रिटायर्ड प्रोफेसर है। वहीं सीपीआईएम से कमलेश एक कंस्ट्रक्शन वर्कर है।...

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