सवा सौ साल के इतिहास में पहली बार ऐसा अड़ा कि मारे नहीं मरा दसकंधर...अपलक निहारते डेढ़ लाख लोग

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कोटा. फटे कपड़े... टूटे धड़ और खोखले जिस्म के बावजूद दसकंधर रावण दशहरा मैदान में ऐसा अड़ा कि निगम अफसरों और आतिशगरों की लाख कोशिशों के बाद भी उसका एक भी सिर नहीं जल सका। आखिर में आतिशगरों ने पुतले की रस्सियां खींच उसे नीचे गिरा कर रावण वध की रश्म अदायगी की।

सवा सौ साल के इतिहास में पहली बार रावण के न जलने पर मेला अधिकारी आग और पानी को जिम्मेदार ठहराते रहे। वहीं महापौर और मेला आयोजन समिति ने इस अराजकता के लिए अफसरों को आड़े हाथों लिया। फिलहाल पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए पार्षदों की तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है।...

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