अलविदा वैज्ञानिक बाबू! आपका जीवन प्रतिभाओं को रोशनी देता रहेगा

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।। रजनीश उपाध्याय ।।

साल 2013 का वह 31 मार्च था. दो दिन बाद वशिष्ठ नारायण सिंह का जन्मदिन था और उन पर एक स्टोरी करनी थी. पटना से आरा होते बसंतपुर गांव पहुंचा. गांव के सीवान पर मिली एक बच्ची से वशिष्ठ नारायण सिंह के घर का पता पूछा, तो उसने 'ना' में सिर हिलाया. पास खड़े एक नौजवान ने कहा- 'विज्ञानी बाबू के घरे जाये के बाऽ? चलीं सभे.' गलियों से गुजरते हुए नौजवान बताते रहे कि गांव में सभी लोग उन्हें विज्ञानी बाबू ही कहते हैं. यहां तक कि छोटे बच्चे भी.

देश-दुनिया में मशहूर महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के लिए उनके गांव ने संबोधन का शब्द ढूंढ़ निकाला था- वैज्ञानिक या विज्ञानी बाबू. यह गांव के लोगों की उनके प्रति अटूट श्रद्धा का द्योतक भी था....

फोटो - http://v.duta.us/aNEJdwAA

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