धनवान होने का घमंड कभी नहीं करना चाहिए

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श्योपुर/कराहल

सत्यनारायण मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में पंडित आचार्य ऋषिराज महाराज ने वामन अवतार, लक्ष्मी जन्म की कथा श्रद्धालुओं को सुनाई। जिसमें आचार्य ने कहा कि राजा बली बड़े पराक्रमी और दानी थे। भगवान के वे बड़े भक्त भी थे, लेकिन वे बहुत घमंडी थे। तब भगवान के मन में राजा बली की परीक्षा लेने की सूझी और वामन अवतार लेकर उसके यज्ञ में पहुंच गए। जैसे ही वे राजा बली के यज्ञ स्थल पर गए, वे उनसे बहुत प्रभावित हुए और भगवान के आकर्षक रूप को देखते हुए उन्हें उचित स्थान दिया।

उन्होंने कहा कि जब दान की बारी आई, तो राजा बली ने भगवान के वामन अवतार से दान मांगने के लिए कहा, तब उन्होंने राजा बली से राज्य में तीन पग जमीन मांग ली। राजा बली मुस्कुराए और बोले तीन पग जमीन तो बहुत छोटा-सा दान है। महाराज और कोई बड़ा दान मांग लीजिए, पर भगवान के वामन अवतार ने उनसे तीन पग जमीन ही मांगी। राजा बली ने संकल्प के साथ उन्हें तीन पग जमीन दान में देने की घोषणा की। इसके बाद भगवान दो पग में राजा बली के पूरे राज्य को नाप दिया, लेकिन तीसरे पग के लिए राजा बली के पास देने के लिए कुछ भी नहीं था। तब भगवान ने बली से पूछा कि अपना तीसरा पग कहां रखूं। तब राजा बली ने महादानी होने का परिचय देते हुए तीसरे पग के सामने अपने आपको समर्पित कर दिया।...

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