मोतियाबिंद और इम्यूनिटी के लिए काफी कारगर है ये पौधा, शोध में आया सामने

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बिलासपुर। गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (केन्द्रीय विश्वविद्यालय) की प्राकृतिक संसाधन अध्ययनशाला के अंतर्गत फार्मेसी विभाग में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवा पर शोध किया गया है। शोधार्थी डॉ. सुरेन्द्र एच. बोडख़े, सह प्राध्यापक फार्मेसी विभाग ने इस विषय का अध्ययन किया है। उनकी शोध निर्देशक डॉ. अल्पना राम, सह प्राध्यापक,फार्मेसी विभाग हैं।

डॉ. सुरेन्द्र एच. बोड़के ने अपने शोध में औषधीय पौधों जैसे मॉरिना लान्गिफीलिया और बाउद्विनिया वैरिगाटा के महत्वपूर्ण फार्माकीलॉजिकल गुणों जैसे इम्यूनोमाड्यूलेटर एंटी इन्फ्लैमेटरी, एन्टी ऑक्सीडेंट और एंटी कैटेरेक्ट (मोतियाबिंद रोधी) क्षमता और अत्यंत लाभकारी गुणों का अध्ययन किया।

इस महत्वपूर्ण शोध में उन्होंने सर्वप्रथम इन औषधीय पौधो का इक्स्टैऊक्टशन इथेनॉलिक किया और पाया कि इन पौधों में महत्वपूर्ण रासायनिक तत्व जैसे कैफिन एसिड, औलिनालिक एसिड, आइसोरेटिवीन, केमफेरल फ्लेवोन इत्यादि प्रचुर मात्रा में है जो मनुष्य की इम्यूनीटी और अन्य बीमारियों को प्रभावी रूप से ठीक करने में सक्षम है। उक्त पौधों में पाये जाने रासायनिक तत्वों के फार्माकीलासिकल गुण जैसे इम्यूनोमॉडयूलिटरी और एॅटीकैटेरेक्टीक एक्टिवीटी को समझने के लिए बहुत प्रकार के इन विट्रो और इन वीवो अध्ययन किया गया। इस अध्ययन के लिए वोबाइन लेंस, चिक एम्ब्रियपे लेंस और एल्बिनो चूहों का उपयोग किया गया, और पाया गया कि मॉरिया लान्गिफीलिया एक अति लाभकारी इम्यूनोमॉडयूलेटर है। बाउहिनीया वैरिगाटा भी मोतियाबिंद निवारक औषधीय पौधा है। इन पौधों में उपरोक्त गुणों के अलावा भी अन्य महत्वपूर्ण फार्माकोलाजिकल गुण पाये गये, जो मनुष्य के बहुत से रोगों जैसे लीवरटाक्सिसीटी और तनाव कारकों को कम करने की क्षमता रखता है।

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