शुद्ध के लिए युद्ध में हार गया प्रशासन, शासन ने नहीं दी मिलावटखोरों पर रासुका की अनुमति

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नरसिंहपुर. शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने मिलावट रोकने के लिए व्यापक अभियान चलाया था जिसे यहां शुद्ध के लिए युद्ध का नाम दिया गया था। लेकिन इस युद्ध में प्रशासन हार गया और उसे मिलावटी माल बनाने और बेचने वालों के आगे अपने हथियार डालने पड़ गए। जिसकी वजह यह है कि यहां जिन आरोपियों पर प्रशासन ने रासुका लगाकर उन्हें जेल भेजा था उनके खिलाफ शासन ने मामला चलाने के लिए अनुमति नहीं दी लिहाजा एक माह में ही वे जेल से बाहर आ गए और प्रशासन की मेहनत पर पानी फिर गया।

प्रशासन ने यहां जुलाई माह से मिलावट के खिलाफ अपनी पूरी ताकत से अभियान चलाया था जिसके तहत 18 सितंबर को प्रशासन ने २ गुड़ भट्ठियों पर दबिश दी थी जहां 64 क्विंटल दूषित गुड़ पाया गया था । यह गुड़ स्पेशल क्वालिटी और गोल्ड मद्रासी के नाम से बनाया जा रहा था। मौके से राजस्व एवं खाद्य विभाग के अधिकारियों की टीम ने बड़ी मात्रा में कार्टून और पैकेट भी बरामद किए थे । बनाए गए गुड़ में केमिकल्स का भी उपयोग किया गया था। बदबूदार राब में कीड़े बिलबिला रहे थे । एसपी ने रासुका के तहत कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार कर जिला प्रशासन को भेजा था। जिस पर जिला दंडाधिकारी व कलेक्टर दीपक सक्सेना ने सलीम खान उम्र 52 साल पिता अली हसन खान निवासी मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश और पवन पिता सत्येंद्र यादव निवासी करेली को जेल भेज दिया था। कलेक्टर ने रासुका की कार्रवाई के लिए शासन से अनुमति मांगी थी लेकिन शासन ने अनुमति नहीं दी जिसकी वजह से दोनों को जेल से रिहा कर दिया गया । नियमानुसार शासन से अनुमति मिलने के बाद मामला हाईकोर्ट की एडवाइजरी कमेटी को भेजा जाता है जिसके बाद आरोपी को रासुका में निरुद्ध रखने व आगे की कार्रवाई तय होती है।...

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