अब अयोध्या न कश्मीर... सिर्फ किसानों और गरीबों से रिश्ता जोड़ते रहे योगी

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पीलीभीत। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि एक फायरब्रांड नेता की है। नूरानपुर गांव में पहुंची जनता ने उम्मीद लगा रखी थी कि उनके भाषण में अनुच्छेद 370 और अयोध्या के राममंदिर जैसे मुद्दों का जिक्र जरूर होगा। लेकिन योगी का आधा घंटे का भाषण में तराई के किसानों पर केंद्रित रहा। उन्होंने सरकारी योजनाओं को गरीबों तक पहुंचाने की चिंता जाहिर की। ।

मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ का पीलीभीत में तीसरा दौरा था। उन्होंने अपने भाषण की शुरूआत अपराह्न 3.25 बजे भारत माता की जय और वंदे मातरम तीन बार बोलकर की। इसके बाद पांडाल में तालियों की गड़गड़ाहट गूंजने लगी तो लगा कि सीएम जरूर कुछ गर्मजोशी की बात करेंगे। लेकिन अगले पल ही उन्होंने तराई बेल्ट के किसानों को मिट्टी से सोना उगलने वाला परिश्रमी किसान बताया। फिर किसान हित में पीलीभीत में 51 हजार किसानों के ऋण मोचन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, सिंचाई योजना, का जिक्र करते हुए अन्य की तुलना में भाजपा सरकारों को किसानों का हितैषी साबित करने की कोशिश की। सीएम का अधिकांश भाषण किसान और विकास योजनाओं पर केंद्रित रहा। गांव और गरीब पर फोकस कर सीएम ने कहा कि अति पिछड़े इलाके के नूरानपुर गांव में आज तक कोई सीएम तो क्या, विधायक भी नहीं आया होगा। मगर, वह सरकार की योजनाओं का फायदा समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना चाहते हैं, इसलिए आम नागरिकों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए गरीबों के घर तक जाने में भी गुरेज नहीं।...

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