आज भी इस पेड़ का रहस्य कोई नहीं जानता, कई कहानियां जुड़ी हैं इससे

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उज्जैन. सम्राट विक्रमादित्य और बेताल पच्चीसी और सिंहासन बत्तीसी की कहानियां तो बहुत सुनी होंगी, लेकिन शायद आप नहीं जानते होंगे कि जिस पेड़ पर बेताल उल्टा लटकते थे, उस पेड़ के नीचे कोई ज्यादा देर ठहर नहीं सकता। यह स्थान आज भी वीरान पड़ा है।

ओखलेश्वर शमशान में एक तांत्रिक बाबा

ओखलेश्वर शमशान में एक तांत्रिक बाबा इसी पेड़ के समीप अपनी झौपड़ी में सिद्धियां करते हैं और वहीं रहते हैं। कहा जाता है कि यह स्थान महाकाल वन में है, जहां भयानक जंगल हुआ करता था। यह स्थान अब भी वीरान ही है। यहां कम लोग ही आते हैं। सम्राट विक्रमादित्य प्रजा की रक्षा के लिए जंगलों में निकलते थे। तभी उनके सामने भयावह घना बरगद का पेड़ और उस पर लाल होंठ, बड़े नाखुन, लंबे बाल वाला उलटा लटका सफेद पोश बेताल... उनके सामने आ जाता था। वीर बेताल उनकी पीठ पर बैठकर अनोखी घटनाओं पर आधारित कहानियां सुनाते और उसका उत्तर देते ही वह गायब हो जाते। यहीं से शुरू होती है विक्रम बेताल से जुड़ी पच्चीसी कहानियां। आज वह पेड़ तो नहीं है लेकिन शिप्रा किनारे एक टीला है जो उस पेड़ के होने की कहानी को जिंदा रखे हुए है। हालांकि वर्तमान में उस टीले पर एक अघौरी ने अपनी कुटिया बना ली है और वह वहां रहकर ही तांत्रिक क्रियाएं करते हैं।...

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