चौंकाने वाला है सब्जियों के दामों का अंतर, महंगाई की मार झेल रहे पश्चिमी यूपी के लोग

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सब्जी में महंगाई का ऐसा तड़का लगा कि फुटकर के दामों में तेजी बनी हुई है। नवीन मंडी से शहर की छोटी मंडियों में पहुंचकर सब्जियों के दाम जहां दोगुने हो रहे हैं, वहीं कॉलोनियों में तो तीन गुना रेट पर बेचा जा रहा है। सब्जियों के राजा आलू पर भी जहां महंगाई तारी है वहीं टमाटर भी महंगाई में तपकर और ज्यादा लाल हो गया है। महंगे अदरक ने चाय का स्वाद बिगाड़ दिया है। हालांकि मूली, पालक और हरा धनिया अभी भी लोगों की जेब को राहत पहुंचा रहा है।

अमूमन हर सब्जी में प्रयोग होने वाला आलू महंगाई के चलते आंखें तरेर रहा है। नवीन मंडी में 3797 प्रजाति के 50 किलो आलू की बोरी 500 रुपये की है तो वहीं चिप्सोना आलू की बोरी 600 रुपये में मिल रही है। ऊना (हिमाचल प्रदेश) से आ रहा नया आलू 900 से 1000 रुपये प्रति 50 किलोग्राम बोरी मिल रहा है। यानी नया आलू थोक में 18 से 20 रुपये किलो मिल रहा है। लेकिन यहां से यह आलू सदर और लालकुर्ती मंडी पहुंचने पर 40 रुपये किलो हो रहा है। कॉलोनियों में तो 50 से 55 रुपये प्रति किलो तक बेचा जा रहा है। थोक में टमाटर के दाम 40 रुपये प्रति किलो हैं, लेकिन फुटकर में 60 से 80 रुपये तक बेचा जा रहा है। अलवर की 30 से 40 रुपये प्रति किलो वाली प्याज 50 से 60 रुपये तक बेची जा रही है। चाय को कड़क और स्वादिष्ट बनाने वाला अदरक भी 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रहा है।...

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