टिप्पणी : प्रशासनिक सुस्तता पर भारी अंधविश्वास

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ब्रजेश चौकसे/होशंगाबाद. अंधविश्वास की एक और दुकान नयागांव के निकट जंगल में खुल गई। या यूं कहें कि खुद प्रशासन ने इस बेल को पनपने दिया जो दो माह में फल-फूलकर उसके लिए ही सिरदर्द बन गई। अज्ञानियों की भीड़ में शामिल होकर कुछ 'ज्ञानीÓ अफसर भी अपने संकटहरण के लिए पेड़ को छू आये। ग्रामीण तो यहां तक कह रहे हैं कि एक टीआई और वहां तैनात पुलिसवाले नित इस कथित अदृश्य शक्ति के आगे नतमस्तक होकर ही ड्यूटी शुरू करते थे। इन अफसरों ने तनिक भी विवेक का इस्तेमाल नहीं किया कि उनका यह कदम लोगों की इस मनोवृत्ति को और बलवान ही करेगा। वह भी उन हालातों में जब लोग मनघढ़ंत किस्से-कहानियों से प्रभावित होकर अपनी समस्याओं के निदान के लिए वहां पहुंच रहे हैं और एक को देखकर दूसरे आंख मूंदकर उसका अनुशरण करने में लगे हैं। जबकि इस मामले में प्रशासन, पुलिस और वन विभाग को पहले ही दिन फैली अफवाह से सतर्क हो जाना चाहिए था। वहां प्रवेश पर सख्ती से रोक लगा देना चाहिए थी, न कि लोगों सुरक्षा और सुविधा के लिए वहां अमला तैनात करने, अस्थायी चौकी खोलने और बैरिकेट्स लगाने के इंतजाम करना चाहिए थे। इसके उल्ट उसे जागरूकता अभियान चलाना चाहिए था, जो ठीक होने का दावा कर रहे थे उन्हें सामने लाकर असलियत उजागर करना चाहिए थी। लेकिन तब आला अफसरों ने इस पर विचार करना तक जरूरी नहीं समझा और अब भी जब इस अंधविश्वास के कारण आधा दर्जन गंभीर मरीज अपनी जान गंवा चुके हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखना चुनौती बन गया है, जिम्मेदार अपनी ढपली अपना राग अलपने में लगे हैं। वन महकमा कह रहा है, प्रतिबंध लगाना प्रशासन का काम है। पुलिस कप्तान कह रहे हैं, हमारा काम सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था देना है और कलेक्टर को अब भी सख्ती से भीड़ को रोकने के आदेश देने के पहले रिपोर्ट का इंतजार है। एसडीएम ने जरूर पिछले दिनों हटाई गई धारा 144 एक बार फिर इस पेड़ के चारों तरफ और उससे प्रभावित दो गांवों में लागू कर दी है। लेकिन लोग अब भी वहां पहुंच रहे हैं। जबकि जिस तरह एक दिन पूर्व पुलिस पर हमला हुआ, उसके बाद तो पुलिस और प्रशासन के तेवर सख्त हो ही जाना चाहिए थे। न केवल हमलावर हवालात में होना चाहिए थे, बल्कि उस पेड़ के पास परिंदा भी न पहुंच पाए ऐसे इंतजामात कर देना चाहिए था। ताकि अंधविश्वास की गहराती जड़ें यहीं सूख जाएं। वरना वह दिन दूर नहीं जब यहां पुलिस को एक अलग थाना खोलना पड़ेगा और संसाधनों के साथ अलग अमला तैनात करना पड़ेगा। इसलिए अभी सही समय है कि सभी विभाग के अफसर समन्वय बनाकर इस समस्या को यहीं दफन कर दें।

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