डीजे पर बजती रही शेर की आवाज, चहलकदमी करते रहे हाथी

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बभनी। हाथियों को भगाने के लिए तीसरे दिन भी बुधवार की रात शेर की गर्जना की आवाज डीजे पर बजाई गई। शेर की आवाज पूरी रात जंगल में गुंजती रही। वन विभाग की 14 सदस्यीय निगरानी टीम जंगल के किनारे किनारे भ्रमण करती रही। हाथियों का झुंड थोडा सा मौका मिलते ही गांव की ओर अपना रुख करत लेकिन शेर की आवाज की दहाड़ सुनते ही जंगल की ओर सिमट जाते। ग्रामीणों की माने तो हाथियों ने भलपहरी ग्राम पंचायत के नवाटोला गांव में घुसने का दुस्साहस किया। उस गांव में तीन किसानों जैन प्रताप सिंह, अरुण कुमार सिंह तथा छोटेलाल के धान की फसलों को नुकसान भी पहुंचाया,लेकिन निगरानी टीम के अलर्ट होने से गांव में नही घुस पाये। बुधवार की रात में भी डीजे पर शेर की गर्जना की आवाज का प्रसारण किया गया। निगरानी टीम डीजे के साथ मगरमांड, डूमरहर, रंपाकुरर, शीशटोला तथा नवाटोला गांव में तथा जंगल से होते हुए रात भर भ्रमण किये। निगरानी टीम के साथग्रामीण भी रात भर घूमते रहे। हालांकि हाथियों का भय अभी भी ग्रामीणों में बना हुआ है। मगरमांड से रंपाकुरर होते हुए शीशटोला तक के जंगलों में ही हाथियों का झुंड विचरण कर रहा है। जब तक छत्तीसगढ़ के जंगल में हाथी नही चले जाते तब तक ग्रामीणों को राहत नही है। विगत 22 दिनों से जंगली हाथियों का झुंड बभनी थाना क्षेत्र के सीमावर्ती गांवों में तहलका मचाये हुए हैं। हाथियों के लगातार उत्पात से ग्रामीण न चैन से खाना खा पा रहे हैं और न ही नींद भर सो पा रहे हैं। उनको भय है कि न जाने कब हाथियों का दल गांव में घुस आये और उत्पात मचाना शुरू कर दें। इसके पूर्व भी हाथियों ने सीमावर्ती गांवों में क्षति पहुंचाया है लेकिन एक से दो दिनों तक ही रहे।...

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