त्रेता युग में भगवान विष्णु की भक्ति को सर्वस्व माना- पुरोहित

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सीहोर.

भगवान श्रीकृष्ण नित्य ही माखन चोरी लीला करते हैं। मां यशोदा के बार बार समझाने पर भी श्रीकृ ष्ण नहीं मानते हैं तो मां यशोदा ने भगवान को रस्सी से बांधना चाहा पर भगवान को कौन बांध सकता है। भगवान मां की दयनीय दशा को देखते हुए स्वयं बंध जाते हैं। इसलिए भगवान को न धन, पद व प्रतिष्ठा से नहीं बांध सकता। भगवान तो प्रेम से बंध जाते हैं।

शहर के चाणक्यपुरी सांई मंदिर के समीपस्थ चल रही श्रीमद्भागवत कथा में चौथे दिन यह बात पंडित अजय पुरोहित ने कहीं। कथा में श्रीकृष्ण के जन्म का वर्णन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने कृ ष्ण के जन्म पर झूमते हुए खुशियां मनाई। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने नंद के आनंद भयों, जय कन्हैया लाल की के जयकारे लगाए और उत्साह के साथ भगवान कृ ष्ण का जन्मोत्सव मनाया। गुरुवार को कथावाचक ने कहा कि त्रेता युग में भगवान विष्णु की भक्ति को सर्वस्व माना है। द्वापर युग में तप को विशेष महत्व दिया है। कलयुग में श्रीमद् भागवत कथा श्रवण को मोक्ष के द्वार का रास्ता माना है। कलयुग में आयु कम है। इसलिए भागवत कथा श्रवण से मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं। राजा पारीक्षित को कथा श्रवण के सात दिन बाद मोक्ष मिला था। भगवान की निस्वार्थ भाव से अनन्य भक्ति करना चाहिए। भगवान से कुछ नहीं मांगे। प्रभु भक्ति करते रहे। प्रभु खुद फ ल देते है। सारे पापों का नाश करते है। शुक्रवार को सात दिवसीय भागवत कथा के पांचवें दिवस भगवान श्रीकृष्ण की बाललीला का वर्णन किया जाएगा।

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