नाटक बर्बरीक देख रोमांचित हुए दर्शक

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सीधी। इंद्रवती नाट्य समिति सीधी द्वारा आयोजित एवं संस्कृति संचालनालय मध्यप्रदेश द्वारा प्रायोजित पांच दिवसीय महाउर ग्रामांचल महोत्सव 2019 का बुधवार की शाम शहर के मानस भवन में समारोह पूर्वक संपन्न हुआ।

समापन समारोह के अवसर पर सर्वप्रथम इंद्रवती लोक कला ग्राम बरसेनी के लोक कलाकारों ने मानस भवन के सामने मुक्ताकाशी मंच में सैला नृत्य की अद्भुत प्रस्तुति दी, उसके बाद लोक कला ग्राम बरसेनी के ही गुदुम बाजा के कलाकारों ने गुदुम बाजा नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी, तदुपरांत इंद्रवती लोक कला ग्राम रामपुर के कलाकारों ने अहिराई नृत्य से दर्शकों का दिल जीत लिया। इसके बाद 7 बजे से मानस भवन के अंदर इंद्रवती नाट्य समिति सीधी के संरक्षक इंजीनियर आरबी सिंह, डॉ.अनूप मिश्र, डॉ.शिव शंकर मिश्र सरस, डॉ.सुरेंद्र सिंह, एड.रंजना मिश्रा ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत किया, इसके बाद शिवांगी मिश्रा ने सरस्वती वंदना गाकर स्वर की देवी का आह्वान किया। अगली कड़ी में बाल कलाकार मान्या पांडेय ने बघेली लोकगीत गायन से दर्शकों का मन मोह लिया। वैष्णवी मिश्रा ने संस्कृति श्लोक गाकर ईश्वर की स्तुति की जो दर्शकों को काफ ी पसंद आया। कार्यक्रम की अगली कड़ी में भारतीय रंगमंच विभाग पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के विद्यार्थियों ने नरेंद्र बहादुर सिंह, रोशनी प्रसाद मिश्र व प्रजीत साकेत के मार्गदर्शन में बघेलखंड की कोहरउहीं गाथा की सुमिरनी फि र क्रमश: बन्नी गीत, करमा गीत, टप्पा गीत व बघेली नाटक बर्बरीक का गीत प्रस्तुत किया। इन विद्यार्थियों ने न सिर्फ गीत गाया बल्कि अपने भाव भंगिमाओं के साथ गीत को प्रस्तुत कर दर्शकों का दिल जीत लिया। समारोह के अंत में नरेंद्र बहादुर सिंह द्वारा लिखित व नीरज कुंदेर द्वारा निर्देशित बघेली नाटक बर्बरीक का अद्भुत मंचन किया गया। नाटक बर्बरीक की कथा मूलत: महाभारत से ली गई है जो एक ऐसे योद्धा के इर्द गिर्द घूमती है जिसे दिति माता से अपराजिता विद्या का वर प्राप्त था, बर्बरीक भीम पुत्र घटोत्कच का बेटा था जिसके पास मात्र तीन बाण थे और वह एक बाण से पूरे महाभारत को पल भर में समाप्त करने की क्षमता रखता था और इसी बात से घबराकर कृष्ण ने उसे छल करके सुदर्शन चक्र से मार दिया। इस भीषण नर संहार का एक मात्र चश्मदीद गवाह बर्बरीक ही था, लेकिन दुर्भाग्य यह कि उसका भी सिर अलग और धड़ अलग था, वह युद्ध तो नहीं कर सकता था पर योद्धाओं को कृष्ण के फ र्जी राष्ट्रवाद की पोल तो खोल ही सकता था। कहानी दो सूत्रधारों के माध्यम से आगे बढ़ती है जहां एक सूत्रधार खोखले धर्म की बात करता है वहीं दूसरा सूत्रधार मानव धर्म को ही सबसे बड़ा धर्म बताता है, ऐसे में बात बढ़़ते-बढ़़ते समसामयिक भारत के अंतद्र्वंद तक आ पहुंचती है। कृष्ण व बर्बरीक दोनों के सार्थक संवाद सुनकर दर्शकों के रोंगटे खड़े हो गए। झांझी और बर्बरीक के संवाद से यह पता चल जाता है कि महाभारत का यह अ_ारह दिवसीय भीषण नर संहार कौरव पांडव का धर्मयुद्ध नहीं बल्कि व्यक्तिगत कृष्ण की झूठी धर्मध्वजा जिसके लिए हर रोज लाखों करोड़ों की संख्या में निरपराध सेना मारी जाती रही। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों द्वारा विचार रखे गए व कलाकारों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।

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