बच्चों में तेजी से बढ़ रही मधुमेह की बीमारी-विश्व मधुमेह दिवस पर बच्चों को दिए बचाव के टिप्स

  |   Pratapgarh-Rajasthannews

प्रतापगढ.खाने-पीने की बात पर अभी तक यही कहा जाता था कि 40 साल की उम्र तक खा लो। इसके बाद संयम रखना होगा। लेकिन ये बात झूठी लगने लगी है। इसकी वजह यह कि 30 से 40 साल की उम्र में ही डायबिटीज जैसी खतरनाक बीमारी होने लगी है। इक्का दुक्का नहीं बल्कि ओपीडी में आने वाले बहुत से मामलों में डायबिटीज के कुल मरीजों में 30 से 40 फीसदी रोगी कम उम्र के हैं। ये बात रिसर्च में भी सहीं साबित हो चुकी है। इसी मुद्दे को लेकर गुरूवार को राजकीय एकलव्य मॉडल जनजाति बालिका आवासीय उच्च माध्यमिक विद्यालय टिमरवा में चिकित्सा विभाग द्वारा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें स्वास्थ्य विभाग की ओर से विषय विशेषज्ञों ने शुगर की बीमारी से बच्चों को आगाह किया। इस अवसर पर एनसीडी कार्यक्रम में विशेष रूप से जानकारी देने आए महेश पाटीदार ने बताया कि कम उम्र के बच्चे भी इस बीमारी के शिकार हो रहे है। उन्होंने बताया कि बड़े शहरों में ही नहीं छोटे शहरों में भी कम उम्र के बच्चों में शुगर की समस्या है। इसके पीछे की वजह अनिमिमित दिनचर्या और फास्ट फूड है। इस अवसर पर एफसीएलसी प्रखर शाह ने चिकित्सा विभाग द्वारा एनसीडी कार्यक्रम में जागरूकता काय्रक्रम के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिल कुमार साल्वी ने बच्चों को अच्छी हेल्थ और हाइजिन के टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि अच्छे स्वास्थ्य से अच्छा मन होता है, और यही अच्छा मन स्वस्थ्य भारत और प्रतापगढ़ के विकास में अपना योगदान देता है। क्या कहते है विशेषज्ञजिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ धीरज सेन ने बताया कि डायबिटिज से शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर असर पड़ता हैं। उन्होंने कम उम्र के बच्चों में डायबिटिज की बीमारी को भविष्य के लिए बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि आजकल की दिनचर्या, फास्ट फूड और अनियमित खान पान की आदतें बच्चों को तेजी से बीमार बना रही है, इन्हीं में एक बीमारी मोटापा और शुगर भी है। जो काफी बच्चों में देखने को मिल रही हैं उन्होंने कहा कि डायबिटीज अपने आप में एक बड़ी बीमारी है, इससे किडनी, हार्ट, आंखें और नर्वस सिस्टम पर बुरा असर पड़ता है। 40 फीसदी मरीज बीच में ही छोड़ देते हैं इलाजआरसीएचओ डॉ दीपक मीणा ने बताया कि कुछ मरीजों इलाज से फायदा हो जाता है। शुगर का स्तर कंट्रोल होते ही उन्हें लगता है कि डायबिटीज हमेशा के लिए चला गया और वे दवा छोड़ देते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। इस दौरान उनका शुगर लेवल तेजी से बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि करीब 40 फीसदी मरीज इलाज छोड़ देते हैं। जिसका उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है।

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