बिना पुरुषार्थ के काललब्धि भी व्यर्थ है: विशुद्ध सागर

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भिण्ड. पुरुषार्थ किए बिना काललब्धि भी कुछ नहीं कर सकती, उसके लिए भी हमें पुरूषार्थ की ओर अग्रसर होना पड़ेगा। बिना बीज के किसी भी बगिया अथवा खेत में पौधा अंकुरित नही होता। गुरुवार को यह बात जैन संत आचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने नशिया प्रांगण में आयोजित पंच कल्याणक प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के गर्भ कल्याणक पर अपने मंगल प्रवचनों में कही।

जैनाचार्य ने कहा कि जैसे किसी बगीचे का मालिक अथवा किसान मिट्टी में बीज ही न डाले और न ही उसमें खाद-पानी दे तथा अपने घर आकर बैठ जाए, कुछ समय पश्चात् वहीं किसान और माली अपने बगीचे और खेत में जाए तो क्या उन्हें फूल या फसल प्राप्त होगी? ऐसे ही समय के अनुसार काललब्धि तो आएगी लेकिन काटोगे वही जिसका तुमने पुरुषार्थ किया है। पाषाण से भगवान बनाने के लिए जो पंचकल्याणक होते हैं उसमें गर्भकल्याणक की महिमा है। जैन दर्शन ही ऐसा दर्शन है जिसमें गर्भ कल्याणक को आनंदमयी पर्व के साथ मनाया जाता है। जब जीव का गर्भ ही नही होगा तो संतान कहां से होगी। उन्होनें कहा कि आज के समय में बहू-बेटी के गर्भ में ही भविष्य के भगवानों की मृत्यु हो रही है। उन्हें बोझ समझा जा रहा है। पंचकल्याणक प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में भगवान को गर्भ कल्याणक की पूर्व की क्रियाएं वैदिक मंत्रो'चार व विधि-विधान से हुई। गर्भ की पूर्व की क्रियाओं में गर्भ कल्याणक का पूजन इत्यादि मांगलिक कार्यक्रम हुए, जिनमें वेदी शुद्धि तथा नवीन प्रतिष्ठा होने वाली प्रतिमाओं को मण्डप में विराजमान कराया गया। माता मरूदेवी को गर्भ में तीर्थंकर आदिनाथ के आते ही सोलह स्वप्न दिखाए। राजा नाभिराय द्वारा राज दरबार लगाकर नाटक मंचन के माध्यम से सोलह स्वप्न का अर्थ भी बताया गया।...

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