भागवत कथा की श्रवणेच्छा मात्र से ही हृदय में कैद हो जाते प्रभु : राजेन्द्र दास महाराज

  |   Sagarnews

सागर. बालाजी मंदिर प्रागंण में बने विशाल कथा स्थल में गुरुवार से भागवत कथा का प्रारंभ हो गया। कथा के पहले ही दिन मलूक पीठाधीश्वर स्वामी राजेन्द्रदास देवाचार्य की कथा श्रवण करने के लिए हजारों की संख्या भक्तों के साथ देशभर के संत यहां पहुंचे। कथा सम्राट राजेन्द्रदास ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा अतीत के शोक, भविष्य के भय और वर्तमान के मोह से निवृत कराती है। स्वामी जी ने भागवत कथा की महिमा बताते हुए कहा कि इसकी श्रवणेच्छा मात्र से ही प्रभु हृदय में कैद हो जाते है। उन्होंने गौ माता को साक्षात अग्निहोत्र और यज्ञ बताया। उन्होंने कहा कि वही ब्राह्मण ब्राह्मण है जो गौ उपासक है। इसी तरह वही क्षत्रिय, क्षत्रिय है जो गौ रक्षक है, वही वैश्य, वैश्य है जो गौ पोषक है और वही शूद्र, शूद्र है जो गौ सेवक है। गीता में भगवान कृष्ण ने कहा है कि यदि जीवन में श्रद्धा न हो तो यज्ञ, हवन, दान और तय सब बेकार है। श्रद्धा के बिना किए गए कर्म का कोई फल नहीं मिलता। जीवन में श्रद्धा होनी ही चाहिए। साधको की सबसे बड़ी पंूजी श्रद्धा ही है। बिना महात्म्य श्रवण के श्रद्धा नहीं है।...

यहां पढें पूरी खबर- - http://v.duta.us/gifa8QAA

📲 Get Sagar News on Whatsapp 💬