मेले में तय होते हैं रिश्ते, 400 साल से जारी है परंपरा

  |   Burhanpurnews

धूलकोट . सुक्ता नदी भीमकुंड पर मेला लगता है जिसका रोचक इतिहास है। पास के ग्राम डोंजर के सुक्ता नदी के भीमकुंड पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन यह मेला लगता है। यह मेला भील समाज के लोगों की आस्था का केन्द्र है।

400 सालों से लग रहा है मेला

भील समाज प्रदेश सचिव संतोष दांगोडे ने बताया कि भील समाज के लोगों द्वारा अपने बुजुर्गों की याद में पूर्णिमा के दिन अपने घरों में श्राद्ध करते हैं, जिसके लिए वह बुजुर्गों के लिए एक आकृति बनाते हैं, जिसकी पूर्णिमा से दो दिन पूर्व से पूजा अर्चना शुरू करते हैं। पूर्णिमा पर लगने वाले मेले में भीमकुंड पर विसर्जन किया जाता है। यह मेला दो जिले की सीमा पर लगता है। मेले में दोनों जिलों की पुलिस की ड्यूटी लगाई जाती है। निबोंला थाना प्रभारी जगदीश सिंधिया, पुलिस चौकी प्रभारी अर्चना चौहान, प्रधान आरक्षक अमित हनौतिया, सुभाष मोरे सहित बल के साथ पुलिस मौजूद रही। मेले में विभिन्न प्रकार मिठाइयां, कपड़े, खिलौने की दुकान एवं झूले लगते हैं। समाजजनों द्वारा मेले में खरीदारी भी की जाती है।...

यहां पढें पूरी खबर- - http://v.duta.us/c2MZ8wAA

📲 Get Burhanpur News on Whatsapp 💬