स्कूल में नहीं आई रसोइयां तो शिक्षिका ने बच्चों के लिए पकाया खाना

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उमरिया. जिस प्रकार से मां संतान का रिश्ता पवित्रता एवं नि:स्वार्थता से भरा होता है। उसी प्रकार गुरू और शिष्य का रिश्ता भी पवित्र एवं नि:स्वार्थ होता है। स्कूल में विद्यार्थी स्वस्थ्य एवं साफ सुथरे हों, वे अच्छे से पढ़ाई कर प्रगति कर रहे हो तो उनकी उपलब्धि पर शिक्षक को खुशियां मिलती है। यदि स्कूल में आये छोटे छोटे विद्यार्थी किसी कारण से भूंखे रह जाए तो भला शिक्षक कैसे बर्दास्त कर सकता है। कुछ ऐसा ही वाक्या शासकीय प्राथमिक विद्यालय पटपरिहा टोला में देखने मिला।

जहां मध्यान्ह भोजन पकाने वाले रसोईया किसी कारण से स्कूल से अनुपस्थित थे। मध्यान्ह भोजन का समय हो गया था। छोटे छोटे बच्चें मे भूख का असर दिखने लगा था। जब यह बात शिक्षिका ऊषा तिवारी के समझ मे आई तो उन्होंने इन बच्चों के लिए स्वयं भोजन पकाना प्रारंभ कर दिया। अपनी शिक्षिका को भोजन पकाते देख विद्यार्थी प्रसन्न हो उठे। इसी दौरान अनुवर्तन टीम स्कूल पहुंच गई। उन्होनें जब शिक्षक का बच्चो के प्रति यह अनुराग देखा तो प्रसन्न हो उठे तथा टीम के सदस्यों ने उनके इस कार्य की सराहना की।...

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