सैटेलाइट इमेज से 60 किमी पहले से ही चक्रवात का पूर्वानुमान

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इसरो के पूर्व चेयरमैन व पद्म विभूषण के. कस्तूरीरंगन ने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत इतना विकसित हो चुका है कि इसका कई क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जा रहा है। डाटा, इमेज के आधार पर मॉडल तैयार कर पूर्वानुमान के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

किसी भी क्षेत्र में चक्रवात के पहुंचने से करीब 50-60 किलोमीटर पहले ही पूर्वानुमान लगाया जाता है। कुछ देर पहले जानकारियां मिलने से चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों की आबादी को विस्थापित कर राहत और बचाव के लिए माकूल तैयारियां का मौका मिलता है।

हालांकि भारत के तटीय क्षेत्रों में अधिक आबादी होने की वजह से चक्रवात से प्रभावित क्षेत्रों का दायरा 150 किलोमीटर तक बढ़ जाता है। ऐसे में जरूरी है कि पूर्वानुमान कुछ और पहले लगाए जाएं ताकि अधिक से अधिक लोगों को चक्रवात के विपरीत प्रभावों और नुकसान से बचाया जा सके। इसके लिए देश के अंतरिक्ष वैज्ञानिक लगातार प्रयासरत हैं। कस्तूरीरंगन बृहस्पतिवार को टेरी इंस्टीट्यूट आफ एडवांस स्टडीज के 12वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।...

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