सात माह से एनआरसी में नहीं है शिशु रोग विशेषज्ञ, बढऩे लगा क्षेत्र में कुपोषण का ग्राफ

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खिरकिया। कुपोषित बच्चों को पोषण देने के मामले में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र स्थित पोषण पुनर्वास केन्द्र पिछले साल प्रदेश में दूसरे नंबर पर रहा था मगर इस बार पोषण के मामले में पिछड़ रहा है। केंद्र के लिए शिशु रोग विशेषज्ञ का सात महीने से नहीं होना और कुपोषित बच्चों को अस्पताल लाने वाले कर्मचारियों के हाथ भुगतान नहीं लगना कुपोषण का ग्राफ बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं मगर जिम्मेदार इससे बेपरवाह हैं।

कमियों से लक्ष्य पर असर

अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था अच्छी नहीं होने से केन्द्र में बच्चों की आवक पर इसका असर दिख रहा है। विकासखंड के आदिवासी अंचलों में कुपोषण से जिंदगी की जंग लड़ रहे बच्चों को पोषित करने का ग्राफ पिछले कुछ वर्षो में ऊपर चढ़ा था लेकिन अब दोबारा इसका स्तर नीचे गिर रहा है। विभागीय लापरवाही से कुपोषित बच्चे पुनर्वास केन्द्र तक नहीं पहुंच पा रहे हंै। शत प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति वाला करने वाला पुनर्वास केन्द्र केवल 30 से 35 प्रतिशत ही लक्ष्य हासिल कर पा रहा है।...

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