सरकार से 'संजीवनी' की उम्मीद

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मंतोष कुमार सिंह

अन्नदाता उदास है। चिंतित और परेशान है। खून-पसीने से सींचने के बाद भी मक्का को कम दाम मिल रहे हैं। बोवनी के समय फॉल आर्मी वर्म कीट ने हमला कर दिया। कई जतन करने के बाद पौधे तैयार हुए तो अतिवृष्टि की मार पड़ गई। फिर भी किसान ने हार नहीं मानी। दिनरात मेहनत कर फसल को मंडी तक पहुंचाया, लेकिन बेमौसम बारिश ने तैयार फसल पर ग्रहण लगा दिया। मक्का का दाना चमकदार नहीं होने के कारण उचित कीमत नहीं मिल रही है। औसत गुणवत्ता ने किसान का गणित ही बिगाड़ दिया है।

बेटा-बेटी की शादी सिर पर है। उधारी में लिए गए खाद बीज के पैसे देने हैं। अगली फसल की तैयारी करनी है, लेकिन मक्का की कम कीमत ने किसानों के हाथ पैर बांध के रख दिए हैं। कई किसानों को तो लागत निकलनी भी मुश्किल लग रही है। सरकारी भाव को लेकर प्रदेश सरकार ने अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं की है। बोनस को लेकर भी असमंजस की स्थिति है। सरकार ने बोनस के संबंध में कोई घोषणा नहीं की है।...

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