सर्वे और बजट में 'कैद' हो गई बाल श्रमिकों की शिक्षा

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चित्तौडग़ढ़. जिले में बाल श्रमिकों की शिक्षा से जोडऩे बाल श्रमिक विद्यालय बंद हुए तीन सत्र हो गए लेकिन जिम्मेदार अभी सर्वे नहीं करा पाए है। ऐसे में बाल श्रमिकों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोडऩे पर भी सवालिया निशान खड़े हो गए है। हर बच्चों को शिक्षा से जोडऩे के लिए बाल श्रमिकों की पहचान कर उनकों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय बाल श्रमिक परियोजना का शुभारंभ किया। शुरुआत दौर में इस योजना की रंगत भी दिखाई दी लेकिन तीन-चार साल से यह योजना पहले बजट और अब सर्वें में ही अटक गई जिससे बाल श्रमिकों को शिक्षा से वंचित रहना पड़ रहा है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय बाल श्रमिक परियोजना लागू की गई जिसमें बाल श्रमिक व अन्य श्रमिक बाहुल्यों इलाकों का सर्वे कराकर जिले में पहले साल ही ३५ स्कूलों का संचालन किया जिसमें ५०-५० बच्चों के हिसाब से १७५० बच्चों को जोड़ा गया। उसके बाद २००९-१० से जून २०१३ में ३६ तथा जुलाई २०१३ में जून २०१६ में २७ स्कूलों का संचालन किया गया। इन स्कूलों में बच्चों को शिक्षा के लिए एनजीओ को जिम्मा दिया गया। बच्चों को तीन साल में शिक्षा के साथ व्यावसायिक शिक्षा का भी ज्ञान देने के साथ उनकों पांचवी कक्षा तक के स्तर के लिए तैयार करने के बाद स्कूलों की शिक्षा से जोडऩे के तैयार किया गया । जानकारी के अनुसार वर्तमान में यह योजना प्रदेशभर में एक-दो जिलों को छोड़कर सभी जिलों में बंद पड़ी हुई है। इस योजना में बाल श्रमिक स्कूल से जुडऩे वाले बच्चों को प्रतिमाह निर्धारित छात्रवृति भी दी गई है। जानकारी के अनुसार वर्तमान में छात्रवृत्ति की राशि भी ५०० रुपए तक बढ़ा दी गई है।...

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