Khatra Vehicles Are Increasing Pollution, Deteriorating Health

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मऊ। जनपद में खटारा वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इन वाहनों की वजह से सड़कों पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। जहां इनसे प्रदूषण बढ़ रहा तो वहीं लोगों की सेहत के लिए भी खतरनाक साबित हो रहे। इन वाहनों का संचालन रोकने में पुलिस और परिवाहन विभाग के अधिकारी लापरवाही बरत रहे।

जिले में वर्ष 2000 से 2013 की अवधि में एक लाख 20 हजार 638 वाहनों का पंजीकरण एआरटीओ कार्यालय में कराया गया था। इसके बाद पहली जनवरी 2014 से 31 अक्तूबर 2019 तक 10 हजार 394 व्यवसायिक वाहनों के साथ ही एक लाख 56 हजार 217 नीजी वाहनों का पंजीकरण कराया गया। इनके अलावा जिले में बहुत सेे पुराने ऐसे वाहन भी संचालित हो रहे हैं जिनकी आयु 15 साल से भी अधिक हो चुकी है। ऐसे वाहन ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर चलते देखे जा सकते हैं। इन वाहनों का प्रयोग स्कूली बच्चों को ढोने, सवारियों को ढोने आदि के लिए किया जाता है। शहर में भी टेंपो, विक्रम, निजी बसें और जीपों को चलते देखा जा सकता है। ऐसे वाहनों से काफी मात्रा में निकलने वाला धुआं रोड पर चलने वालों की नाक और मुंह से होकर सीधे फेफड़ों तक पहुंचता है। ऐसे खटारा वाहन लोगों की सेहत पर काफी बुरा प्रभाव डाल रहे हैं। कई खटारा ट्रकों को भी सड़क पर सामान ढोते देखा जा सकता है। इस बाबत एआरटीओ अवधेश प्रसाद का कहना है कि खटारा वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए लगागातार अभियान चलाया जा रहा। आगे भी कार्रवाई की जाएगी। कोपागंज हसनपुर निवासी फूलचंद यादव कहते हैं कि समय के साथ बढ़ते पर्यावरणीय प्रदूषण को रोकने के लिए लोगों को स्वत: जागरूक होना होगा। अधिकारियों को भी खटारा वाहनों पर प्रभावी अंकुश लगाने के प्रति उत्तरदायी बनाना होगा। अधिवक्ता अरुण यादव कहते हैं कि लोग पर्यावरण के प्रति संवेदनशील नहीं है और न ही सड़कों पर बढ़ते बोझ के दुष्प्रभाव के खतरे के प्रति सजग हैं। खटारा वाहनों से सड़कों पर बोझ तो बढ़ता ही है, लोगों की सेहत पर भी काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। यातायात माह में बढुआ गोदाम-काझा मार्ग पर चल रहे ओवरलोड डग्गामार वाहन।- फोटो : MAU

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