👉काफिले में शामिल सीआरपीएफ के 👮जवान की जुबानी हमले का 👀आंखों-देखा हाल

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पुलवामा अटैक के चश्मदीद गवाह सीआरपीएफ की 43वीं बटालियन में शामिल 28 साल के जवान जोदूराम दास ने हादसे की भयावता को साझा करते हुए कहा कि जम्मू के सीआरपीएफ ट्रांजिट कैंप से श्रीनगर के लिए हमारा सफर तड़के तीन बजे शुरू हुआ।

हमारे काफिले में करीब 40 बसें थीं। एक कतार में हम आगे बढ़ रहे थे। हमारा काफिला बिना कहीं रुके करीब 12 घंटे आगे बढ़ा। बीच में दो सीआरपीएफ कैंप पड़े, लेकिन हम नहीं रुके। बहुत ठंड थी और बर्फ पड़ रही थी। बर्फ की वजह से हम कैंप्स में अपनी गाड़ियां पार्क नहीं कर सकते थे। शाम पांच बजे के करीब हम पुलवामा पहुंचे।

पुलवामा से करीब 200 मीटर ही आगे निकले थे, तभी हमारे काफिले की बस हवा में उड़ गई और जोरदार धमाका हुआ। हमने हवा में उड़ती बस में बैठे सीआरपीएफ जवानों के शरीर टुकड़े-टुकड़े होकर हवा में उड़ते दिखे। इससे पहले कि हम कुछ समझ पाते, बस का मडगार्ड हमारी बस के शीशे पर आकर लगा और शीशा चूर-चूर हो गया। हम समझ गए थे कि यह आईईडी ब्लास्ट है। जब इस तरह का ब्लास्ट होता है तो सब टुकड़े-टुकड़े हो जाता है। सिर्फ बस का इंजन अपनी जगह पर टिका था। बाकी सभी हिस्से 50 से 60 फुट दूर जाकर गिरे। हमने इस तरह के आईईडी ब्लास्ट की बातों नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुनी थीं। लेकिन जम्मू-कश्मीर में कभी नहीं।

धमाका इतना जोरदार था कि जिस बस में हम थे, उसके इंजन ने भी काम करना बंद कर दिया। हम बस से उतरे। उतरते ही पाया कि दूर से फायरिंग हो रही है। हमारी बस में चार लोगों के पास हथियार थे। हमारी टीम ने बचाव के लिए तुरंत गोलियां चलाईं। चार या पांच राउंड फायरिंग के बाद आतंकी भाग गए। वो तीन या चार लोग थे। बस की छत पर सीआरपीएफ गार्ड संभावित पत्थरबाजी से बचाने के लिए बैठा था। वो गंभीर रूप से घायल हो गया।

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