👉गमजदा परिजनों की आंखों😭 से नहीं थम रहे आंसू, मिनटों में उजड़ गई 🌍दुनिया

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जम्‍मू एवं कश्‍मीर के पुलवामा में गुरुवार को हुए आतंकी हमले के बाद पूरा देश गमजदा है, पर यह भी सच है कि जिन परिवारों ने इस हमले में अपनों को खोया है, उनके दुख के सामने हर किसी की तकलीफ मामूली है। इस हमले में किसी का सुहाग उजड़ गया तो कोई अनाथ हो गया और किसी के बुढापे की लाठी छिन गई।

शहीदों का परिवार बिलख रहा है। किसी ने होली पर घर आने का वादा किया था तो किसी ने जल्‍द श्रीनगर पहुंचकर फोन पर सही-सलामत पहुंच जाने की खबर देने का वादा किया था, किसी को बहन की शादी का इंतजार था तो किसी को अपने अजन्‍मे बच्‍चे का, पर मिनटभर में सब खाक हो गया, सब मिट गया और एक शून्‍य उभर आया।

जिससे पार पाना किसी भी शहीद परिवार के लिए आसान नहीं है। सच है, समय हर जख्‍म भर देता है। इस पीड़ा की तीव्रता भी समय के साथ जाती रहेगी, पर अपनों को खोने की टीस तो आजीवन रहेगी।

देश जहां वीर सपूतों को याद कर रहा है और श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है, वहीं शहीदों के परिवार भी सलामी के हकदार हैं, जिनका मनोबल इस जघन्‍य हमले में अपने बेटों को खोने के बाद भी नहीं टूटा है और वे गमगीन होने के बाद भी भारत मां की सेवा के लिए अपने दूसरे सपूतों को भी सीमा पर भेजने के लिए तैयार हैं, पर उनकी बस एक ही मांग है, 'पाकिस्‍तान को सबक सिखाओ, धूल चटाओ।'

इस हमले में कम से कम 44 जवान शहीद हुए हैं, जिनमें से 12 अकेले यूपी से हैं। बिहार से भी दो जवान शहीद हुए हैं। शहीद जवान राजस्‍थान, तमिलनाडु, पंजाब, पश्चिम बंगाल, जम्‍मू एवं कश्‍मीर से भी हैं, जिनके घरों में मातम प‍सरा है। अपने बेटे को खोने वाले रतन ठाकुर के पिता कहते हैं, 'मैं भारत मां की सेवा के लिए अपने दूसरे बेटे को भी भेजने के लिए तैयार हूं, पर पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया जाना चाहिए।'

वाराणसी के सपूत रमेश यादव भी शहीद हो गए, जिन्‍होंने हादसे से कुछ ही देर पहले पत्‍नी और परिजनों से फोन पर बात की थी और श्रीनगर पहुंचने पर फिर बात करने की बात कही थी। पर वह उनका आखिरी फोन साबित हुआ। बेटे की शहादत के बाद बूढ़े पिता की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे।

यहां पढ़ें पूरी खबर व देखें सभी फोटो-http://v.duta.us/Fs1U9AAA

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