[alwar] - दोस्त को फोन कर कहा, भगवान ने चाहा तो फिर मिलेंगे, लेकिन अपने दोस्त से मिलने से पहले ही शहीद हो गया राजस्थान का ये लाल

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भरतपुर. करीब आठ हजार की आबादी का छोटा सा गांव सुंदरावली...यहां गांव में घुसते ही जो खामोशी छाई है...वह बता रही है कि यहां के लाल ने बड़ा काम कर दिखाया है। 92 बटालियन में भर्ती कांस्टेबल जीतराम गुर्जर के घर सुबकुछ सामान्य दिख रहा है। उसके दोनों बच्चे आंगन में खेल रहे हैं। पत्नी व माता-पिता सामान्य दिनों की तरह दैनिक कार्य निपटाने में जुटे हैं। लेकिन उसका छोटा भाई विक्रम परिजनों से छिपकर भाई के शहादत के दर्द को छिपाने में लगा है।

वह घर से बाहर आता है रो देता है। उसकी खामोशी परिजनों की चिंता तो बढ़ा रही है। लेकिन वह डर रहा है कि अगर बुढ़ापे में मां-बाप को इस शहादत का पता चला तो उनको कुछ न हो जाए। विक्रम ने बताया कि 12 फरवरी को एक महीने की छुट्टी बिताने के बाद ही भाई वापस गया था। जाने से पहले दोस्त अजय गुर्जर, वीरप्रताप से मिलने उनके घर गया था। जहां उसने कहा था कि दोस्त होली पर आने का मन है। ईश्वर ने चाहा तो फिर मिलेंगे। अब वो दोनों दोस्त भी रात से ही मेरा दर्द बांट रहे हैं। हमने सोचा भी न था कि इस बार की होली भाई के बगैर बैरंग हो जाएगी। भाई की शादी चार साल पहले लोहरवाड़ा (उत्तर प्रदेश) की रहने वाली सुंदरी के साथ हुई थी। भाभी ने रात को भी पूछा कि कैसे सुस्त हो। मैंने इतना तो बता दिया कि भाई लापता है। लेकिन उनको कह दिया कि वैसे सबकुछ ठीक है। भाई का नाम शहीद की सूची में नहीं है। शहीद जीतराम सीआरपीएफ में 2010 में हुई भर्ती में कांस्टेबल जीडी के पद पर तैनात हुआ था।...

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