[anuppur] - कोर्ट के आदेश की अनदेखी पड़ी भारी: उच्चतम न्यायालय के आदेश में सिविल कोर्ट कोतमा ने रामनगर आरओ झिरिया माईंस को किया सील

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वाटर कैरियर के काम को कॉलरी द्वारा बंद करने तथा मजदूरों द्वारा न्यायालय के शरण का मामला

अनूपपुर। हसदेव क्षेत्र की अंडर ग्राउंड माईंस में शामिल आरओ झिरिया माईंस को उच्चतम न्यायालय के आदेश में सिविल कोर्ट कोतमा द्वारा १३ फरवरी की दोपहर सील करने की कार्रवाई की गई। जिसमें कोर्ट के अधिकारी-कर्मचारियों की निगरानी में रामनगर क्षेत्र झिरिया माइंस क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय, हरी रूम, बत्ती घर, सहित अन्य को सील कर दिया गया। जिसके कारण १३ फरवरी की दोपहर बाद से खदान से कोयला उत्पादन का कार्य बंद हो गया है। कोर्ट के इस कार्रवाई के बाद हसदेव प्रबंधक झिरिया माईंस के कर्मचारियों व मजदूरों को अब राजनगर खदान में शिफ्त करने की तैयारी कर रही है। हांलाकि झिरिया माईंस के सील करने की कार्रवाई में स्थानीय प्रशासन ने अनिभिज्ञता जताई है। एसडीएम कोतमा ने कार्रवाई की जानकारी नहीं होने की बात कही है। वहीं नायब तहसीलदार ने इसे कोर्ट के आदेश में स्वयं सिविल कोर्ट कोतमा द्वारा संज्ञान लिए जाने की बात कही है। रामनगर निवासी तथा झिरिया माईंस प्रकरण से सम्बंधित मंगल सिंह राठौर के अनुसार 1 जुलाई 1982 से रामनगर ब्लॉक नंबर ०१ में मंगल सिंह एवं अन्य 25 लोगों द्वारा वाटर कैरियर (पानी भरने) का कार्य किया जाता था। कर्मचारी कंपनी के क्वार्टरों में कांवर के माध्यम से पानी भरा करते थे। इसमें उनका पेमेंट कॉलरी के द्वारा काउंटर पेमेंट द्वारा किया जाता था। लेकिन यह कार्य रामनगर उपक्षेत्र एसईसीएल द्वारा बंद करा दिया गया। इसमें कार्यत मजदूर ने उच्च न्यायालय जबलपुर में शरण ली, इसके बाद उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की। जबकि १९८२ से पूर्व वाटर कैरियर में कार्यरत रहे कर्मचारियों 1982 में परमानेंट कर दिया गया था। उनके स्थान पर हम 26 लोग पानी भरने वाटर कैरियर का काम करते रहे। वर्ष 1982 से 1999 तक हम लोगों ने वाटर कैरियर का कार्य किया था। २७ जनवरी २०११ को न्यायालय द्वारा 26 मजदूरों को ‘ए’ कैटेगरी का पेमेंट देने फैसला सुनाया था। इसके बावजूद कालरी प्रबंधन ने कोर्ट के आदेश को दरकिनार कर दिया। कर्मचारियों ने विवश होकर पुन: कोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने आइ ए नंबर 3/ 18 तथा उसके जवाब एवं प्रकरण का अवलोकन किया, अवलोकन से यह स्पष्ट हुआ कि प्रकरण में मधुवन को आदेश पत्रिका की तिथियों 18 अगस्त 2015, 25 अगस्त 2015, 5 अक्टूबर 2015, 18 दिसम्बर 2015, 16 जनवरी 2016, 19 मार्च 2016, 12 मर्ई 2016, 12 अप्र्रैल 2016, 2 जुलाई २०16, 29 सितम्बर २०16, 16 नवम्बर २०16, 2 नम्बवर 2017, 25 फरवरी 2017 एवं आगे की तिथियां 31 अक्टूबर 2017, 8 दिसम्बर 2017 मेंं भी निष्पादन प्रकरण में डिग्री अनुसार पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने माना कि 7 वर्ष तक अवधि बीत जाने के बावजूद भी डिग्री का एक अश: का पालन नहीं किया गया। अवलोकन से प्रतीत होता है कॉलरी डिग्री का पालन नहीं करना चाहता है, जानबूझकर लंबित रखने के तरह के प्रयास किया जाता रहा है। जिसपर कोर्ट ने आदेश 3 दिन के भीतर तलवाना अदा करने पर मदयूंन विरुद्ध चल-अचल संपत्ति कुर्की वारंट जारी किया जाए के निर्देश दिए। यह आदेश 2 फरवरी 2019 को जारी किया गया जिसमें आदेश का पालन 13 फरवरी को किया गया। कॉलरी कर्मचारियों का कहना है कि बड़े अधिकारियों की लापरवाही की वजह से यह नौबत आई है। खदान के अंदर अगर पानी भर गया तो करोड़ों की संपत्ति का नुकसान होगा। बताया जाता है कि झिरिया माईंस से रोजाना लगभग ३०० मीट्रिक टन कोयले का उत्पाद होता है।

फोटो - http://v.duta.us/hPYP4gAA

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