[auraiya] - वह शख्स मेरी तल्ख जुबानी से कट गया...

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औरैया। नगर पालिका परिषद द्वारा आयोजित शरदोत्सव प्रदर्शनी पंडाल में बुधवार की रात स्थानीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवियों ने पूरी रात कविता पाठ करते हुए श्रोताओं की तालियां बटोंरी।

कवि सम्मेलन का शुभारंभ समाजसेवी लालजी शुक्ला ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मुख्य अतिथि लालजी शुक्ला ने कहा कि शरदोत्सव प्रदर्शनी स्थानीय प्रतिभाओं को हमेशा मंच उपलब्ध कराती रही है। इन्हीं मंचों के जरिए स्थानीय प्रतिभाएं आगे निकलकर देश में अपना व शहर का नाम रोशन कर सकती हैं। कविता के जरिए स्वस्थ मनोरंजन के साथ संदेश देना भी कवि का धर्म है। काव्यपाठ की शुरुआत कवयित्री दीक्षा गुप्ता ने सरस्वती वंदना से की। इसके बाद युवा कवि ललित तिवारी ने मुक्तक और गीतों के जरिए समा बांधा। गोपाल पांडे ने देशभक्ति गीत, अभिषेक तिवारी, आशीष मिश्र ने हास्य रस की रचना पढ़कर श्रोताओं को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। कवि गोविंद द्विवेदी ने.. अब नए प्रतिमान करने ही पड़ेंगे, अनिरुद्ध त्रिपाठी ने... तुम रूप की धूप समेटो आंगन से, डॉ. गुरुप्रताप ने ...दरवाजों की मौन अगला धीरे से खटकाई होगी कविता पढ़ी। अमर सिंह भदौरिया, राधाचरण गुप्त ने लोक भाषा में काव्यपाठ किया। इस मौके पर रमेश शर्मा, हरिशंकर मिश्रा, अयाज अहमद अयाज, विवेक अवस्थी, अफजल फफूंद, अनवर अहमद, रामस्वरूप दीक्षित, पंथ नारायण पांडे, प्रशांत अवस्थी, मिथुन मिश्रा, सुरेश बाबू चतुर्वेदी, प्रकाश चंद्र मिश्रा ने काव्यपाठ किया। कार्यक्रम का संचालन अजय शुक्ल ने किया।...

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