[bassi] - जब भी गांव आते थे, स्कूल जरूर आते थे

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सत्येन्द्र पोरवाल

जयपुर. बिलान्दरपुर से मात्र चार किलोमीटर दूर गोविन्दपुरा बांसड़ी का रोहिताश कश्मीर के पुलवामा हमले में शहीद हो गया, जिसने भी यह समाचार सुना, एकदम अवाक हो गया। पहली बार में तो कोई शब्द ही नहीं निकले, लेकिन जैसे ही खुद को संभाला तो फिर रोहिताश के देश प्रेम के प्रति भावना व जज्बे व को धाराप्रवाह बताते ही चले गए रामपाल।

पत्रिका से विशेष बातचीत में बिलान्दरपुर के श्री श्याम बाल सीनियर सैकेण्डरी विद्यालय के प्राचार्य रामपाल यादव ने बताया कि रोहिताश बचपन से ही होनहार छात्र रहे। उनका विद्यालय तब दसवीं कक्षा तक ही था। कक्षा एक से दस तक रोहिताश ने लगातार यहां अध्ययन किया। इस दौरान शुरू से ही विभिन्न राष्ट्रीय पर्वों व खेलकूदों के आयोजनों में रोहिताश बढ़चढ़कर हिस्सा लेते थे। दसवीं के बाद ग्याहरवीं कक्षा अमरसर व बारहवीं में अध्ययन के लिए रोहिताश फिर बिलान्दरपुर के सरकारी विद्यालय में आए। पुरानी स्मृतियों को ताजा करते हुए यादव ने बताया कि रोहिताश का विद्यालय से ऐसा नाता जब भी रहा और सेना में ज्वाइन करने के बाद भी उनका क्रम ऐसा ही बना रहा। जब भी रोहिताश गांव में आते, विद्यालय जरूर पहुंचते थे। विद्यालय में विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होते व शिक्षकों का आशीर्वाद लेते। साथ ही विद्यालय के बच्चों को समारोहों में हमेशा यह संदेश जरूर देते थे दुनिया में ऐसा कार्य करों कि लोग आपको जरूर याद करें। बच्चों को देशप्रेम के प्रति सराहनीय संस्मरण रोहिताश बताते थे और आर्मी के साथ-साथ देशप्रेम के प्रति जज्बा बरकरार रखने के लिए उत्साह वर्धन करते थे।...

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