[bilaspur] - जब देश आजादी के लिए अंगे्रजों से लड़ रहा था तब बिलासपुर में दान की भूमि पर शिक्षा की अलख जगी

  |   Bilaspur-Chattisgarhnews

बिलासपुर. न्यायधानी के रूप में स्थापित बिलासपुर में एक ऐसा भी महाविद्यालय संचालित हो रहा है, जो अंग्रेजों के जमाने में दूरदृष्टि के साथ एक समाजसेवी ने छोटी सी संस्था के रूप में शुरु किया था। कालेज का नाम रखा गया शिव भगवान रामेश्वर दयाल (एसबीआर) कालेज। यह बात है वर्ष 1944 की। जब महा कोशल शिक्षण समिति ने बिलासपुर में उच्च शिक्षा के दरवाजे खोलने के लिए शुरुआत की। उस समय आजादी के लिए लोग अंग्रेजों से संघर्ष कर रहे थे।

महाविद्यालय से जुड़ी जानकारी रखने वाले बताते हैं कि उस वक्त कालेज की संबद्धता नागपुर विश्वविद्यालय से लेनी पड़ी थी और एक-एक विषय के लिए कई-कई दिन चक्कर लगाने पड़ते थे। यह कालेज वर्ष 1944 से 1956 तक नागपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध रहा। इसके बाद 1956 से 1964 तक सागर विश्वविद्यालय, 1964 से 1983 तक पंडित रवि शंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर,1984 से 2012 तक गुरु घासीदास विश्वविद्यालय से संबद्ध रहा। वर्तमान में अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय से संबद्ध है।...

फोटो - http://v.duta.us/_-DkrwAA

यहां पढें पूरी खबर— - http://v.duta.us/3MDrjwAA

📲 Get Bilaspur-Chattisgarhnews on Whatsapp 💬